New Delhi : देश में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों से पारित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिल गई है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही अब यह कड़ा विधेयक कानून का रूप ले चुका है। इस कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसेगा और मामलों का निपटारा महज तीन महीने के भीतर किया जाएगा।
New Delhi फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी दैनिक सुनवाई, 90 दिनों में पूरी होगी न्यायिक प्रक्रिया
नए संशोधित कानून का सबसे अहम पहलू मामलों के त्वरित निस्तारण से जुड़ा है। अब हर राज्य में पेपर लीक से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा। इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी और अधिकतम 90 दिनों (3 महीने) के भीतर ट्रायल पूरा कर दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। इसके अलावा, मामलों की विवेचना के लिए 2 महीने की सख्त समयसीमा तय की गई है, जिससे जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो सके।
New Delhi 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना
वर्ष 2024 के पुराने प्रावधानों की तुलना में नए कानून में सजा और आर्थिक दंड को बेहद सख्त बना दिया गया है:
- सजा का दायरा बढ़ा: पहले जहां दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल तक की कैद का नियम था, वहीं अब इसे बढ़ाकर न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 साल तक की कड़ी जेल की सजा कर दिया गया है।
- भारी आर्थिक दंड: पहले पेपर लीक में लिप्त अपराधियों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- विशेष कार्यबल का गठन: मामलों की गहन और पेशेवर ढंग से जांच करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की जाएगी, जो सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेगी।
‘विधेयक से परीक्षा प्रणाली में आएगी पारदर्शिता और निष्पक्षता’ — प्रह्लाद जोशी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस कानून को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के विश्वास को बहाल करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल नकल रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पेपर लीक के पूरे संगठित नेटवर्क और माफिया तंत्र को जड़ से खत्म करने का एक प्रभावी प्रयास है। इससे देश के लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

