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रिपोर्टर: दीनानाथ मौआर

Aurangabad : बिहार के औरंगाबाद जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। रिसियप थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) उमेश कुमार को पटना से आई विजिलेंस (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ धर दबोचा। पुलिस महकमे के भीतर ही घूसखोरी के इस पर्दाफाश के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

Aurangabad जमीनी विवाद और मारपीट केस में राहत देने के नाम पर मांगी घूस

पूरा मामला तेंदुआ गणपत गाँव के निवासी डॉ. लक्ष्मण राम से जुड़ा है। गाँव में नाली-गली विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी, जिसे दो वर्ष पूर्व पंचायत के माध्यम से भी सुलझाने का प्रयास किया गया था। बीते 14 जुलाई को दूसरे पक्ष के मदन राम और अन्य लोगों ने डॉ. लक्ष्मण राम के साथ मारपीट की थी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी थाने में क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई। इस पूरे मारपीट कांड की जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार को सौंपी गई थी। आरोप है कि जांच के नाम पर एसआई उमेश कुमार पीड़ित डॉक्टर पर ही दबाव बनाने लगे और केस में राहत देने के बदले में भारी-भरकम राशि की मांग करने लगे।

Aurangabad नारियल पानी, पेड़ा से लेकर डेढ़ लाख रुपये की मांग और धमकियाँ

पीड़ित शिकायतकर्ता डॉ. लक्ष्मण राम ने आरोप लगाया कि दरोगा जी का रवैया बेहद अड़ियल था। जब भी उन्हें मिलने बुलाया जाता, तो कभी वे नारियल पानी मंगवाते तो कभी पेड़ा और आम खरीदवाते थे। इतना ही नहीं, रिश्वत की रकम न देने पर एसआई उन्हें और उनके बच्चों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने तथा जिंदगी बर्बाद करने की लगातार धमकियां दे रहे थे।

शुरुआत में दरोगा द्वारा डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ। शर्त यह रखी गई कि 50 हजार रुपये की पहली किश्त तुरंत दी जाएगी और बाकी के 50 हजार रुपये काम होने के बाद लिए जाएंगे।

विजिलेंस ने बिछाया जाल और 50 हजार रुपये लेते दरोगा को किया गिरफ्तार

दरोगा की धमकियों और रिश्वतखोरी से परेशान होकर डॉ. लक्ष्मण राम ने सीधे पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से संपर्क कर लिखित शिकायत दर्ज करा दी। विजिलेंस की टीम ने गुप्त रूप से शिकायत का भौतिक सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर दरोगा को पकड़ने के लिए एक विशेष रणनीति बनाई।

तय योजना के अनुसार, जैसे ही पीड़ित ने रिसियप थाने में एसआई उमेश कुमार को 50 हजार रुपये की पहली किश्त सौंपी, पास में ही सादे लिबास में तैनात विजिलेंस की टीम ने तुरंत धावा बोलकर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए टीम आरोपी दरोगा को अपने साथ पटना ले गई। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का हाथ बेहद लंबा है।

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