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by-Ravindra Sikarwar

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में मंगलवार की भारी बारिश के दौरान एक तीन मंजिला इमारत के अचानक ढहने से दो लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। घटना रानीपुरा इलाके के कोष्टी मोहल्ला में सोमवार रात करीब 9 बजे हुई, जहां इमारत के मलबे के नीचे दबने से एक ही परिवार के 14 सदस्य फंस गए। अब तक 11 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन चार घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने निर्माण संबंधी खामियों की जांच शुरू कर दी है, जबकि बचाव अभियान रातभर जारी रहा।

घटना जंहवार मार्ग पर प्रेमसुख टॉकीज के पीछे की है, जहां यह पुरानी इमारत (लगभग 8-10 वर्ष पुरानी) अचानक धंस गई। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें थीं, जबकि ऊपरी मंजिलों पर आवासीय फ्लैट बने हुए थे। मलबा इतना भारी था कि इमारत का लगभग 40-45 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह भरभरा गया, और इससे लगी हुई एक अन्य संरचना को भी नुकसान पहुंचा। मृतकों में 20 वर्षीय युवती आलिफा (जो मलबे के नीचे दबकर अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दी गई) और एक पुरुष फहीम शामिल हैं। घायलों में दो बच्चे और आठ वयस्क हैं, जिन्हें महाराजा यशवंत राव अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया, “इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया, जिससे लोग मलबे में दब गए। अब तक 10 लोगों को अस्पताल पहुंचाया जा चुका है, और संभवतः कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं। बचाव कार्य तेजी से चल रहा है।” कलेक्टर शिवम वर्मा, जो खुद घटनास्थल पर मौजूद थे, ने कहा, “चिकित्सा दल पूरे बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है। इमारत की उम्र करीब आठ वर्ष बताई जा रही है, लेकिन प्राथमिकता सभी को सुरक्षित निकालना है।” निगम आयुक्त हर्षिका सिंह और मेयर पुष्यमित्र भार्गव भी रात भर घटनास्थल पर डटे रहे। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), इंदौर नगर निगम की टीमें और अन्य आपातकालीन सेवाएं जेसीबी, क्रेन और कुत्तों की मदद से मलबा हटाने में जुटी रहीं।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इमारत की नींव कमजोर थी और निर्माण के दौरान उचित बीम व कॉलम का उपयोग नहीं किया गया था। लगातार हो रही बारिश से इमारत के आसपास पानी जमा हो गया, जिसने संरचना को और कमजोर कर दिया। महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि आलिफा को मलबे से निकालकर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घायलों में चार की हालत गंभीर है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है। बचाव दल ने रात भर काम किया और मंगलवार सुबह तक 11 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन मलबे में अभी भी कुछ लोगों के फंसने की आशंका बनी हुई है।

इंदौर में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने शहर को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में जलभराव और सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। यह घटना शहर की पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। नगर निगम ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई है और जांच समिति गठित की है, जो निर्माण मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की सिफारिश करेगी। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारत पहले से ही दरक रही थी, लेकिन मरम्मत के अभाव में यह हादसा हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मलबा हटाते हुए बचावकर्मियों के प्रयास दिख रहे हैं, जहां लोग चिंतित नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को त्वरित बचाव और राहत का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। निर्माण सुरक्षा के मानकों को और सख्त करने की जरूरत है।” यह घटना इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भूकंपरोधी और वर्षा प्रतिरोधी निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित करती है। बचाव कार्य अभी भी जारी है, और प्रशासन ने आसपास के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।