by-Ravindra Sikarwar
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के कुछ विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरे कानून पर स्टे का कोई आधार नहीं है। जानिए नए आदेश के मुख्य बिंदु और उनका असर।
सुप्रीम कोर्ट का वक्फ संशोधन बिल पर अंतरिम आदेश:
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए कानून के कुछ विवादित प्रावधानों पर रोक लगा दी है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पूरे कानून पर स्टे लगाने का कोई आधार नहीं है।
विशेष रूप से, वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए किसी व्यक्ति का कम से कम पांच साल से इस्लाम धर्म का पालन करना जरूरी होना, इस प्रावधान पर रोक लगाई गई है।
आदेश के मुख्य बिंदु
- वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति का इस्लाम धर्म का अनुयायी होना अनिवार्य करने वाले प्रावधान पर रोक।
- यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक राज्य सरकारें नियम निर्धारित नहीं कर लेतीं कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।
- कुछ अन्य विवादित प्रावधानों पर भी रोक।
- पूरे कानून पर स्टे का कोई आधार नहीं।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख:
याचिका में यह भी कहा गया था कि नए कानून के अनुसार गैर मुस्लिम भी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बन सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यह निर्देश दिया कि जहां तक संभव हो, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुस्लिम होना चाहिए।
हालांकि, अदालत ने इस प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब यह है कि अभी भी गैर मुस्लिम वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बन सकते हैं, लेकिन केवल तब जब योग्य मुस्लिम दावेदार मौजूद न हों।
आगे की प्रक्रिया:
अंतरिम आदेश के बाद अब संबंधित पक्षों और राज्य सरकारों को नियम बनाने का समय मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, ताकि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक अधिकारों का संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
