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रिपोर्टर: पवन कुमार सिंह

Saran : सावन माह के दूसरे सोमवार के पावन अवसर पर सारण जिले के ग्रामीण क्षेत्र कुमना स्थित सुप्रसिद्ध बाबा जलेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के सुबह से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा जलेश्वर नाथ के दर्शन किए, विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की।

Saran रामायण काल और कुम्भज ऋषि से जुड़ी है पौराणिक मान्यता

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, बाबा जलेश्वर नाथ धाम का इतिहास त्रेतायुग यानी रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि कुम्भज के विशेष आह्वान पर भगवान शिव और माता पार्वती ने यहां दर्शन दिए थे और शिवलिंग स्थापित किया था। उस काल में इस स्थल के अतिरिक्त संपूर्ण क्षेत्र जलमग्न था, जिसके कारण इस धाम का नाम ‘जलेश्वर नाथ’ पड़ा। स्थानीय लोग इस धाम का संबंध सुंदरकांड की कथाओं से भी जोड़ते हैं, यद्यपि इस पर विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक मत मौजूद हैं।

Saran प्राचीन वृक्ष और महाशिवरात्रि का प्रसिद्ध लकड़ी मेला

मंदिर परिसर में स्थित कई शताब्दियों पुराने विशाल वृक्ष इसकी ऐतिहासिकता और प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यह धाम न केवल सावन में बल्कि महाशिवरात्रि पर भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। महाशिवरात्रि के मौके पर यहां प्रसिद्ध ‘लकड़ी मेला’ आयोजित होता है, जिसमें सारण के अलावा आरा, बक्सर, बलिया, सीवान और गोपालगंज से लोग किफायती दरों पर लकड़ी के सामान खरीदने पहुंचते हैं।

धार्मिक स्थल को पर्यटन का दर्जा देने की उठी मांग

समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत होने के बावजूद बाबा जलेश्वर नाथ धाम को अब तक आधिकारिक पर्यटन स्थल का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित कर यहां मूलभूत नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाए। इससे न केवल धाम का कायाकल्प होगा, बल्कि क्षेत्रीय रोजगार और व्यापार को भी नया आयाम मिलेगा।

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