Raipur–Visakhapatnam ExpresswayRaipur–Visakhapatnam Expressway
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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Raipur–Visakhapatnam Expressway : भारत में सड़क बुनियादी ढांचे (Road Infrastructure) का कायाकल्प तेजी से हो रहा है और इसी कड़ी में एक और शानदार अध्याय जुड़ने जा रहा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध बंदरगाह शहर (Port City) विशाखापत्तनम से जोड़ने वाले रायपुर-विशाखापत्तनम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इस 6-लेन एक्सप्रेसवे के बन जाने से दोनों शहरों के बीच की दूरी बेहद कम हो जाएगी और यात्रियों को जंगलों और पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाले एक बेहद खूबसूरत सफर का अनुभव मिलेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को इसी साल (2026) के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Raipur–Visakhapatnam Expressway 464 किमी का सफर और समय की भारी बचत

वर्तमान में रायपुर से विशाखापत्तनम की दूरी लगभग 595 किलोमीटर है, जिसे तय करने में वाहन चालकों को करीब 13 घंटे का लंबा समय लग जाता है। लेकिन इस नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह दूरी घटकर महज 464 किलोमीटर रह जाएगी। सबसे बड़ी राहत समय को लेकर मिलेगी; अत्याधुनिक इंजीनियरिंग से तैयार हो रहे इस रूट पर यह सफर सिर्फ 4 से 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई प्रमुख आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ेगा।

Raipur–Visakhapatnam Expressway व्यापार को मिलेगी रफ्तार और पर्यटन को नई दिशा

यह एक्सप्रेसवे न केवल तीन राज्यों के बीच की दूरी को मिटाएगा, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक लाइफलाइन साबित होगा। विशाखापत्तनम पोर्ट तक सीधी और तेज पहुंच मिलने से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के उद्योगों को बड़ा फायदा होगा। इसके साथ ही, चूंकि यह एक्सप्रेसवे बेहद घने जंगलों और प्राकृतिक रूप से समृद्ध इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए यह देश के सबसे खूबसूरत एक्सप्रेसवे में से एक होगा। इससे क्षेत्र में ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को एक बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Raipur–Visakhapatnam Expressway पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का अनोखा मॉडल

इस आधुनिक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल (Eco-Friendly) होना है। केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि स्थानीय वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान न पहुंचे।

  • एनिमल अंडरपास: घने जंगलों के बीच वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 27 विशेष कॉरिडोर और अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
  • बंदरों के लिए खास इंतजाम: एक्सप्रेसवे के दोनों ओर रहने वाले बंदरों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए 17 अलग जगहों पर विशेष व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे बिना किसी दुर्घटना के सड़क पार कर सकें।

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