by-Ravindra Sikarwar
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह एक असाधारण और प्रेरणादायक घटना घटी, जब एक पुरुष यात्री ने एक गर्भवती महिला की ट्रेन प्लेटफॉर्म पर ही सुरक्षित प्रसव में मदद की। इस प्रक्रिया में उन्होंने एक डॉक्टर के साथ वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बनाए रखा, जिसके मार्गदर्शन में नवजात शिशु और मां दोनों स्वस्थ रहे। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के बीच मानवता और त्वरित सोच की मिसाल बन गई है।
घटना मंगलवार सुबह करीब 6:45 बजे की है, जब लखनऊ से गोरखपुर जा रही गोरखधाम एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर रुकी थी। ट्रेन में यात्रा कर रही 28 वर्षीय रीता देवी, जो अपनी सास के साथ गोरखपुर जा रही थीं, को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। रीता सातवें महीने की गर्भवती थीं और समय से पहले प्रसव की स्थिति ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया। रीता की सास, शांति देवी, ने बताया, “वह अचानक दर्द से चीखने लगीं और हमें समझ नहीं आया कि क्या करें। ट्रेन में कोई चिकित्सा सुविधा नहीं थी, और हम स्टेशन पर उतर गए।”
उसी समय, प्लेटफॉर्म पर मौजूद 32 वर्षीय संजय मिश्रा, जो पेशे से एक निजी कंपनी में क्लर्क हैं और उसी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, ने स्थिति की गंभीरता को समझा। संजय ने तुरंत अपने मोबाइल फोन से लखनऊ के एक निजी अस्पताल में कार्यरत अपने चचेरे भाई डॉ. अजय मिश्रा को वीडियो कॉल किया। संजय ने बताया, “मैंने देखा कि महिला को तेज दर्द हो रहा था और वहां कोई मेडिकल स्टाफ नहीं था। मैंने तुरंत अपने भाई को कॉल किया, जो प्रसव विशेषज्ञ हैं।”
डॉ. अजय ने वीडियो कॉल पर संजय को शांत रहने और स्थिति का आकलन करने के लिए कहा। उन्होंने संजय को निर्देश दिया कि सबसे पहले रीता को एक साफ और सुरक्षित जगह पर लिटाया जाए। प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य यात्रियों ने मदद के लिए तुरंत चादरें और कपड़े इकट्ठा किए, ताकि रीता को गोपनीयता और आराम मिल सके। रेलवे पुलिस बल (RPF) के दो जवानों, कांस्टेबल रमेश यादव और सुनीता चौधरी, ने भीड़ को नियंत्रित किया और एक अस्थायी घेरा बनाया, ताकि प्रक्रिया में कोई व्यवधान न हो।
डॉ. अजय ने संजय को प्रसव की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया। उन्होंने कहा, “मैंने संजय को बताया कि बच्चा समय से पहले आ रहा है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। उसे साफ कपड़े, पानी और शांत वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कहा।” संजय ने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए रीता को सांस लेने की तकनीक और शरीर को सही स्थिति में रखने के बारे में बताया। करीब 20 मिनट की प्रक्रिया के बाद, रीता ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। नवजात शिशु ने जोरदार रोना शुरू किया, जो यह संकेत था कि वह स्वस्थ है।
घटना के बाद, रेलवे स्टेशन के अधिकारियों ने तुरंत एक एम्बुलेंस बुलाई, और मां और बच्ची को लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉ. शीतल वर्मा ने पुष्टि की कि मां और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. वर्मा ने कहा, “समय से पहले जन्म होने के बावजूद बच्ची का वजन 2.3 किलोग्राम है, और उसकी स्थिति स्थिर है। यह एक असाधारण स्थिति थी, और जिस तरह से एक आम नागरिक ने मदद की, वह सराहनीय है।”
रीता की सास शांति ने संजय और रेलवे कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “संजय भैया ने मेरी बहू और पोती की जान बचाई। भगवान उन्हें लंबी उम्र दे।” संजय ने इस घटना को अपने जीवन का सबसे यादगार पल बताया और कहा, “मैंने सिर्फ इंसानियत का फर्ज निभाया। डॉक्टर साहब का मार्गदर्शन न होता तो यह संभव नहीं था।”
रेलवे के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित सिंह ने इस घटना की प्रशंसा की और कहा कि RPF कर्मियों को उनके त्वरित सहयोग के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे ऐसी आपातकालीन स्थितियों के लिए स्टेशनों पर चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
यह घटना न केवल संजय मिश्रा की त्वरित सोच और मानवता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे तकनीक और सामुदायिक सहयोग मिलकर किसी की जान बचा सकते हैं। सोशल मीडिया पर लोग संजय को “हीरो” बता रहे हैं, और उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।
