रिपोर्टर: खुशबू रावत
New Delhi : महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेषों (अस्थियों) को जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर से भारत वापस लाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। नेताजी की बेटी डॉ. अनीता बोस फाफ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और स्वयं नेताजी की बेटी अपने पिता के अवशेषों को वतन लाने के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष आई हैं।
New Delhi सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देश के बाद खुद सामने आईं बेटी अनीता
इससे पूर्व मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के परपोते द्वारा दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने स्पष्ट किया था कि चूंकि डॉ. अनीता बोस फाफ नेताजी की प्रत्यक्ष कानूनी वारिस हैं, इसलिए उन्हें स्वयं याचिका दाखिल करनी चाहिए। कोर्ट के उसी सुझाव का पालन करते हुए जर्मनी में रह रहीं डॉ. अनीता बोस फाफ ने अब खुद याचिका दाखिल कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
New Delhi ‘नेताजी को मिले अपनी मातृभूमि की माटी पर अंतिम सम्मान’
डॉ. अनीता बोस फाफ लंबे समय से अपने पिता के अवशेषों को भारत लाने की वकालत करती रही हैं। उनका मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम के इस महान नायक को उनकी मातृभूमि की धरती पर पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई और श्रद्धांजलि मिलनी चाहिए। पिछले वर्ष नेताजी के एक अन्य परिजन चंद्र कुमार बोस ने भी इस विषय पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सरकार से हस्ताक्षेप की गुहार लगाई थी।
1945 के विमान हादसे से जुड़ा है इतिहास
प्रचलित मान्यताओं और पूर्व की जांच रिपोर्टों के अनुसार, 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुए एक जापानी सैन्य विमान हादसे में नेताजी गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिसके बाद अस्पताल में उनका निधन हो गया था। सितंबर 1945 से ही उनकी अस्थियां टोक्यो के रेंकोजी बौद्ध मंदिर में एक कलश में सुरक्षित रखी हुई हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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