रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Korea : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले अंतर्गत जनपद पंचायत बैकुंठपुर की ग्राम पंचायत चिरगुड़ा में मुक्तिधाम के निर्माण स्थल को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित मुक्तिधाम घनी आबादी वाले क्षेत्र, शासकीय व निजी स्कूलों तथा शासकीय राशन दुकान के ठीक समीप बनाया जा रहा है। धुएं, बच्चों की सुरक्षा और रोजमर्रा की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने निर्माण कार्य पर कड़ी आपत्ति जताई है और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर निर्माण स्थल को किसी उपयुक्त व दूरी वाले स्थान पर स्थानांतरित करने की गुहार लगाई है।



शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी इलाके के समीप निर्माण पर चिंता
Korea स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे मुक्तिधाम के निर्माण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उसके चुनाव स्थल से असहमत हैं। प्रस्तावित स्थल से महज 50 से 100 मीटर के दायरे में कई परिवारों के मकान स्थित हैं, जहाँ छोटे बच्चों की संख्या अधिक है। इसके अतिरिक्त, निर्माण स्थल के ठीक सामने शासकीय विद्यालय और बगल में निजी स्कूल संचालित हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों का दिनभर आवागमन रहता है।
पास में ही राशन दुकान होने के कारण मुख्य मार्ग पर लगातार भीड़भाड़ बनी रहती है। ग्रामीणों का तर्क है कि आबादी और स्कूलों के बीच अंतिम संस्कार होने से फैलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होगा और बच्चों के मानसिक वातावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अधिकारियों को ज्ञापन और खर्रा नाला के पास वैकल्पिक स्थल का सुझाव
Korea समस्या के समाधान हेतु ग्रामीणों ने उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम), जनपद पंचायत तथा कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर स्थल के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। ग्रामीण ओंकार प्रसाद व पूजा सोनी सहित अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समस्या के हल के रूप में गांव के खर्रा नाला के पास स्थित भूमि का विकल्प सुझाया गया है, जो आबादी और स्कूलों से सुरक्षित दूरी पर स्थित है। हालांकि, शिकायत दर्ज कराने के बावजूद स्थल पर शुरुआती काम जारी रहने से ग्रामीणों में निराशा है।
प्रशासनिक निरीक्षण और त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद
Korea मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय महिलाओं व पुरुषों ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मौके का भौतिक निरीक्षण करने और निर्माण कार्य को तुरंत प्रभाव से रोकने की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जनसुविधा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, न कि आम नागरिकों की समस्याओं को बढ़ाकर। अब यह देखना शेष होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों का संज्ञान लेकर खर्रा नाला या किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर निर्माण की स्वीकृति देता है या नहीं।
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