रिपोर्टर: संदीप सिंह
MP Mandi Board Irregularities : मध्य प्रदेश के कृषि उपज मंडी बोर्ड में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही भारी अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी आदेशों को दरकिनार कर अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अपात्र कर्मचारियों को मलाईदार पदों पर बनाए रखने और ट्रांसफर-पोस्टिंग के नियमों में पक्षपात के गंभीर आरोप लग रहे हैं। आंचलिक स्तर पर डबरा, भितरवार, मंगरौनी, खनियाधाना, पिछोर, करैरा, शिवपुरी और गुना जैसी तमाम मंडियों में यह प्रशासनिक लापरवाही खुलकर सामने आ रही है।

MP Mandi Board Irregularities सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा को ठेंगा, बिना योग्यता के बदल लिए पद
मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार मंडी बोर्ड में वर्ग-3 (Grade-3) के हर कर्मचारी के लिए कंप्यूटर संचालन और हिंदी टाइपिंग का ज्ञान होना तथा इसकी अनिवार्य सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा पास करना बेहद जरूरी किया गया था। इस परीक्षा को पास करने के बाद ही एरियर और पद परिवर्तन का लाभ दिया जाना था।
लेकिन, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डबरा, भितरवार और शिवपुरी संभाग की कई मंडियों में कुछ रसूखदार कर्मचारियों ने अधिकारियों से सांठगांठ कर बिना परीक्षा दिए ही न सिर्फ अपना एरियर निकलवा लिया, बल्कि अपने पदों में भी बदलाव करा लिया। इस बड़े फर्जीवाड़े की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक इन दोषी कर्मचारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं।
MP Mandi Board Irregularities ग्वालियर में अनुकंपा नियुक्तियों और ट्रांसफर पर सवाल
मंडी बोर्ड के उपसंचालक (डीके शर्मा, ग्वालियर) के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में भी विसंगतियां सामने आ रही हैं।
- योग्यता की अनदेखी: सवाल उठ रहे हैं कि ग्वालियर जिले में जितने भी लोगों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है, क्या उन्होंने तय समय सीमा के भीतर अनिवार्य सीपीसीटी परीक्षा पास की है?
- सालों से एक ही जगह जमे: नियमतः सरकारी कर्मचारियों के समय-समय पर ट्रांसफर होने चाहिए, लेकिन ग्वालियर और आस-पास की मंडियों में अनुकंपा नियुक्ति धारक सालों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं। इनके स्थानांतरण न होने के पीछे के कारणों पर भी उंगलियां उठ रही हैं।
MP Mandi Board Irregularities मंडी इंस्पेक्टरों को ‘प्रभारी’ बनाने का खेल; MD की अनुमति पर संशय
एक और बड़ा मुद्दा मंडी इंस्पेक्टरों को प्रशासनिक प्रभार सौंपने का है। विभाग के भीतर ही यह चर्चा गर्म है कि योग्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार करके चुनिंदा मंडी इंस्पेक्टरों को ही महत्वपूर्ण मंडियों का प्रभारी बना दिया गया है।
विभागीय सूत्रों का दावा: इस तरह के प्रभार सौंपने के पीछे स्थानीय स्तर पर सांठगांठ की आशंका है। सवाल यह भी है कि क्या इन इंस्पेक्टरों को प्रभारी बनाने से पहले प्रबंध निदेशक (MD महोदय) से लिखित अनुमति ली गई थी या उन्हें इस पूरे फेरबदल से अवगत भी कराया गया था?
MP Mandi Board Irregularities बोर्ड और गेट से पूर्व अध्यक्षों के नाम हटाने की मांग
प्रशासनिक विसंगतियों के अलावा मंडियों के बुनियादी ढांचे पर लगे नेमप्लेट भी विवादों में हैं। मध्य प्रदेश शासन द्वारा मंडियों में जो स्वागत गेट और मुख्य बोर्ड बनवाए गए थे, उन पर तत्कालीन अध्यक्षों के नाम लिखे हुए हैं। कार्यकाल समाप्त होने या व्यवस्था बदलने के बाद भी क्या इन नामों को हटाया जाएगा या इन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाएगा, यह भी स्थानीय स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
अब देखना यह है कि इस संपूर्ण घालमेल और नियमों की अनदेखी पर मंडी बोर्ड मुख्यालय संज्ञान लेकर कोई बड़ी विभागीय जांच बैठता है या फिर यह भ्रष्टाचार यूं ही फाइलों में दबा रहेगा।

