रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Kanker Cycle Distribution Scheme Issues : सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने और उनके आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई साइकिल वितरण योजना छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में विवादों के घेरे में आ गई है। यहाँ एक सरकारी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को जो साइकिलें बांटी गईं, उनकी घटिया गुणवत्ता और तकनीकी कमियों ने इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Kanker Cycle Distribution Scheme Issues नई साइकिल मिलने की खुशी निराशा में बदली, पहले करानी पड़ी मरम्मत
कांकेर के स्थानीय कन्या शाला स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम के तहत छात्राओं को नई साइकिलें वितरित की गई थीं। लेकिन नई साइकिल पाकर छात्राओं के चेहरे पर जो मुस्कान होनी चाहिए थी, वह तुरंत ही चिंता में बदल गई। वितरण के ठीक बाद देखा गया कि कई साइकिलों के टायरों में हवा तक नहीं थी और कुछ में अन्य तकनीकी गड़बड़ियां थीं। स्थिति यह हो गई कि छात्राओं को खुशी-खुशी अपने घर जाने के बजाय, भारी मन से साइकिल को घसीटते हुए सबसे पहले मरम्मत और हवा भरवाने वाली दुकानों का रुख करना पड़ा।
Kanker Cycle Distribution Scheme Issues ‘साइकिल के बदले पैसे मिलते, तो खरीद लेते बेहतर विकल्प’
साइकिल की इस दयनीय स्थिति पर छात्राओं ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कुछ छात्राओं ने कहा कि अगर सरकार उन्हें खराब गुणवत्ता की साइकिलें देने के बजाय इसकी निर्धारित राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर देती, तो वह कहीं ज्यादा बेहतर होता। ऐसा होने पर वे बाजार से अपनी पसंद और मजबूत टिकाऊ साइकिल खरीद पातीं, जो लंबे समय तक स्कूल आने-जाने में उनका साथ देती। खराब गाड़ियों के मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी उठानी पड़ रही है।
Kanker Cycle Distribution Scheme Issues गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल, उठ रही है जांच की मांग
इस अव्यवस्था को लेकर अब स्थानीय स्तर पर प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है। जागरूक नागरिकों और परिजनों का कहना है कि वितरण समारोह से पहले क्या इन साइकिलों की कोई तकनीकी जांच (Quality Check) नहीं की गई थी? लोगों ने मांग की है कि छात्राओं को इस तरह की असुविधा से बचाने के लिए वितरण से पहले कड़े मानक तय होने चाहिए। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर उचित दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

