रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Energy Drinks Seized in Kota : राजस्थान के कोटा जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी और भ्रामक प्रचार के खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाई है। चम्बल इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक व्यापारिक प्रतिष्ठान पर छापा मारकर विभाग ने विभिन्न ब्रांड्स की करीब 13,410 कैफिनेटेड बेवरेज (एनर्जी ड्रिंक्स) की बोतलें और कैन सीज कर दिए हैं। यह पूरी कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण डॉ. टी. शुभमंगला के दिशा-निर्देशों तथा जिला कलेक्टर पीयूष समारिया के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दी गई।
Energy Drinks Seized in Kota नामचीन ब्रांड्स के ड्रिंक्स जब्त, जांच के लिए भेजे गए सैंपल
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) व अभिहित अधिकारी डॉ. नरेन्द्र नागर ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम ने औचक निरीक्षण के दौरान ‘स्टिंग एनर्जी रेड’, ‘स्टिंग एनर्जी येलो’ और ‘एड्रीनलीन रश’ नामक ड्रिंक्स के तीन अलग-अलग सैंपल लिए हैं। नियमों के उल्लंघन के चलते टीम ने मौके से स्टिंग एनर्जी (रेड और येलो) की 9,570 बोतलें तथा एड्रीनलीन रश की 3,840 बोतलों व कैन को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (FSSAI) एक्ट के तहत तत्काल प्रभाव से जब्त (सीज) कर लिया है।
Energy Drinks Seized in Kota ‘एनर्जी ड्रिंक’ और ‘स्पोर्ट्स ड्रिंक’ लिखना भ्रामक, FSSAI ने कसी नकेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कड़े नियम हैं कि किसी भी कैफिनेटेड पेय पदार्थ पर उपभोक्ताओं को रिझाने के लिए “स्टिम्युलेट्स माइंड” (दिमाग को सक्रिय करना), “एनर्जाइज बॉडी” (शरीर को ऊर्जा देना), “एनर्जी ड्रिंक” या “स्पोर्ट्स ड्रिंक” जैसे भ्रामक दावे प्रिंट नहीं किए जा सकते। यह पूरी तरह से भ्रामक प्रचार (Misleading Labeling) की श्रेणी में आता है। इसी नियम के तहत देश की कई बड़ी बेवरेज कंपनियों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
Energy Drinks Seized in Kota अत्यधिक कैफीन सेहत के लिए खतरनाक, रिपोर्ट के बाद होगी अगली कार्रवाई
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा सामान्य से काफी अधिक होती है, जिसका अत्यधिक सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं को दूध पिलाने वाली माताओं और छोटे बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए ऐसे पेय गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में फूड सेफ्टी कानून के तहत आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

