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रिपोर्टर: संजीव कुमार शर्मा

Bokaro : झारखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नई और व्यापक नीति लेकर आने वाली है। विभागीय स्तर पर इस नई ईवी पॉलिसी को लेकर मंथन तेज हो गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना भी है।

Bokaro पूर्वी भारत में अग्रणी बनने का लक्ष्य

बोकारो पहुंचे राज्य के परिवहन सचिव वरुण रंजन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस नई पहल की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले एक साल के भीतर झारखंड को पूर्वी भारत में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में सबसे अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है। परिवहन सचिव ने कहा कि वर्तमान समय और भविष्य की मांग को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी है, जिससे राज्य में पेट्रोल और डीजल की खपत में भी भारी कमी आएगी।

Bokaro कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन

राज्य सरकार इस नई ईवी नीति को लेकर बेहद गंभीर है और इसे त्रुटिहीन बनाने के लिए लगातार विभागीय बैठकें कर रही है। एक बेहतर और व्यावहारिक नीति बनाने के लिए कर्नाटक समेत देश के उन राज्यों के मॉडल का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है, जहां ईवी और चार्जिंग सिस्टम सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। सरकार यह मानकर चल रही है कि जब तक बैटरी सपोर्ट सिस्टम और चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत जाल नहीं बिछेगा, तब तक लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में हिचकिचाएंगे।

Bokaro ‘ग्राम गाड़ी योजना’ में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें

शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण परिवहन को भी पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम चल रहा है। इसी रणनीति के तहत परिवहन विभाग अपनी महत्वाकांक्षी ‘ग्राम गाड़ी योजना’ के अंतर्गत भी जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने की तैयारी में है। इस पहल से न केवल ग्रामीण इलाकों में प्रदूषण कम होगा, बल्कि लोगों को एक किफायती और आधुनिक सफर की सुविधा भी मिलेगी।

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