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रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्‍तव

Jamshedpur : टाटा एजुकेशन एक्सीलेंस प्रोग्राम (TEEP 2.0) और टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) की साझेदारी में विद्यार्थियों के बीच 21वीं सदी के जरूरी कौशल विकसित करने की दिशा में एक विशेष पहल की गई। इसी क्रम में केरल समाजम मॉडल स्कूल (KSMS) ने 20 और 21 अगस्त 2026 को अपने सभागार में ‘जोहार हाट फॉर स्कूल्स’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सामाजिक और अंतर-सांस्कृतिक कौशल से जोड़ने के लिए कई तरह की गतिविधियां आयोजित की गईं।

कार्यक्रम में 20 स्कूलों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। छात्रों को झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, खान-पान, स्थानीय शिल्प और आदिवासी ज्ञान परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिला। विभिन्न सत्रों को इस तरह तैयार किया गया था कि विद्यार्थी केवल जानकारी हासिल न करें, बल्कि कलाकारों और पारंपरिक ज्ञान के जानकारों से सीधे संवाद भी कर सकें।

सोहराय कला ने खींचा छात्रों का ध्यान

Jamshedpur कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला पर आयोजित विशेष सत्र रहा। विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को इस लोक कला की उत्पत्ति और आदिवासी समाज में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्रों ने जाना कि सोहराय चित्रकला में प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक आकृतियों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

सोहराय कला में पशु-पक्षियों और प्रकृति से जुड़े प्रतीकों का विशेष स्थान है। विशेषज्ञ ने बताया कि फसल और कृषि से जुड़े उत्सवों में इन चित्रों का सांस्कृतिक महत्व किस प्रकार दिखाई देता है। इस सत्र ने छात्रों को कला के साथ-साथ झारखंड की प्रकृति, कृषि और सामुदायिक जीवन के बीच संबंध को समझने का अवसर दिया।

पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प से हुए रूबरू

Jamshedpur कार्यक्रम के दौरान लगाए गए विशेष स्टॉल भी विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें झारखंड के पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। छात्रों ने स्थानीय खान-पान की विविधता और उसमें इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्री के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके अलावा प्राकृतिक और टिकाऊ सामग्रियों से तैयार किए गए कला एवं शिल्प उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके किस तरह उपयोगी और आकर्षक वस्तुएं तैयार की जाती हैं।

आदिवासी चिकित्सा ज्ञान और पारंपरिक उपचार की जानकारी

Jamshedpur कार्यक्रम में झारखंड की प्राचीन उपचार पद्धतियों और स्वदेशी औषधीय ज्ञान को भी विद्यार्थियों के सामने रखा गया। पारंपरिक जड़ी-बूटियों और स्थानीय वनस्पतियों के उपयोग से जुड़े ज्ञान के बारे में जानकारी दी गई, जिसे पीढ़ियों से समुदायों के बीच आगे बढ़ाया जाता रहा है।

छात्रों ने स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक ज्ञान के जानकारों से सीधे बातचीत करते हुए झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं को समझा। इस संवाद ने उन्हें यह महसूस कराया कि संस्कृति केवल किताबों या संग्रहालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने जीवन और परंपराओं में संजोए हुए लोगों के माध्यम से आज भी जीवंत रखा जा रहा है।

सामाजिक और अंतर-सांस्कृतिक कौशल को मिला बढ़ावा

Jamshedpur ‘जोहार हाट फॉर स्कूल्स’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को अलग-अलग संस्कृतियों को समझने, उनका सम्मान करने और विविधता के साथ संवाद करने के लिए तैयार करना भी रहा। इस तरह की गतिविधियां छात्रों में सामाजिक समझ, संवाद क्षमता, सहयोग और सांस्कृतिक संवेदनशीलता जैसे 21वीं सदी के महत्वपूर्ण कौशल विकसित करने में मदद करती हैं।

दो दिनों तक चले इस आयोजन ने विद्यार्थियों को झारखंड की कला, खान-पान, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने के साथ स्थानीय समुदायों और उनके कौशल के प्रति सम्मान की भावना भी मजबूत की। प्रत्यक्ष संवाद और अनुभव आधारित सीख ने कार्यक्रम को छात्रों के लिए यादगार और ज्ञानवर्धक बना दिया।

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