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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Haridwar : आज देशभर में गंगा सप्तमी का पावन पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध घाट ‘हर की पौड़ी’ पर सुबह से ही भक्तों का भारी जमावड़ा देखा गया। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु मोक्षदायिनी गंगा में स्नान कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद ले रहे हैं।

Haridwar पौराणिक महत्व: मां गंगा के पुनर्जन्म का पावन दिन

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के पृथ्वी पर पुनः अवतरण से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही मां गंगा का पुनः प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि इस तिथि को ‘गंगा जन्मोत्सव’ के रूप में भी मनाया जाता है। हरिद्वार के घाटों पर उमड़ी भीड़ इस प्राचीन परंपरा और आस्था के अटूट संगम को दर्शाती है।

Haridwar स्नान-दान का विधान और मोक्ष की कामना

तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान का महत्व अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।

  • पापों से मुक्ति: माना जाता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है।
  • दान-पुण्य: स्नान के पश्चात गरीबों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • धार्मिक अनुष्ठान: घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पितरों के निमित्त तर्पण और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते नजर आए।

Haridwar भक्तिमय वातावरण और प्रशासनिक व्यवस्था

हरिद्वार के विभिन्न घाटों, विशेषकर ब्रह्मकुंड पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। हर-हर गंगे के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान कर मां गंगा की आरती उतारी। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें। पुरोहितों का कहना है कि यह दिन केवल स्नान का नहीं, बल्कि मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व है।

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