Char Dham YatraChar Dham Yatra
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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Char Dham Yatra : उत्तराखंड में प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज और ऑक्सीजन की कमी से होने वाली दिक्कतों से तीर्थयात्रियों को बचाने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय के मुताबिक, यात्रा शुरू होने से लेकर अब तक मार्गों पर स्थापित विभिन्न केंद्रों में 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सफल स्वास्थ्य परीक्षण और स्क्रीनिंग की जा चुकी है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।

Char Dham Yatra पैदल मार्गों पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट सक्रिय, पल्स और ऑक्सीजन की हो रही जांच

गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले मुख्य रास्तों और पैदल ट्रैकों पर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष मेडिकल रिलीफ पोस्ट (MRP) तैनात किए हैं। इन चौकियों पर अनुभवी डॉक्टरों की टीमें, जीवन रक्षक दवाएं और एम्बुलेंस चौबीसों घंटे तैनात हैं। पहाड़ों पर चढ़ाई के दौरान यात्रियों को आने वाली दिक्कतों को भांपने के लिए इन चौकियों पर यात्रियों का ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) और बॉडी ऑक्सीजन लेवल नियमित रूप से मापा जा रहा है।

Char Dham Yatra बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों पर डॉक्टरों की ‘स्पेशल नजर’

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार यात्रा में आने वाले बुजुर्गों, सांस के मरीजों और हृदय रोगियों (Heart Patients) की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। पहाड़ी रास्तों पर तैनात मेडिकल स्टाफ ऐसे संवेदनशील यात्रियों की सेहत पर लगातार नजर रख रहा है। प्रशासन ने देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं से पुरजोर अपील की है कि वे अपने घरों से प्रस्थान करने से पहले एक बार अपनी फिटनेस की जांच जरूर कराएं और डॉक्टरों की लिखित सलाह के बाद ही यात्रा को आगे बढ़ाएं।

Char Dham Yatra गाइडलाइन जारी: सीने में दर्द या सांस फूलने पर न करें अनदेखी, तुरंत लें मदद

बदलते मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थयात्रियों के लिए एक जरूरी स्वास्थ्य गाइडलाइन भी जारी की है। इसमें यात्रियों को डिहाइड्रेशन से बचने के लिए लगातार पानी पीने, चढ़ाई के दौरान बीच-बीच में विश्राम करने और शरीर को पहाड़ों के अनुकूल ढालने (Acclimatization) की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दी है कि यदि किसी भी यात्री को सीने में भारीपन, चक्कर आना या सांस लेने में थोड़ी भी तकलीफ महसूस हो, तो वे इसे मामूली थकान न समझें और तुरंत नजदीकी राहत शिविर से संपर्क करें।

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