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रिपोर्टर: सुनील कुमार

New Delhi : दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर एक ऐसा अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना खुद वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने कभी नहीं की थी। अब रेलवे स्टेशनों पर मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाने वाले रेल कर्मियों को भी अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए जेब ढीली करनी होगी। दिल्ली के प्रमुख हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रेल कर्मचारियों के लिए सालों से चली आ रही मुफ्त पार्किंग (Free Parking) की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। पार्किंग ठेकेदारों को प्रबंधन की ओर से स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि स्टेशन परिसर में वाहन खड़ा करने वाले हर व्यक्ति से शुल्क लिया जाए, फिर चाहे वह कोई आम यात्री हो या रेलवे का अपना कर्मचारी।

New Delhi कर्मचारियों में भारी आक्रोश, आंदोलन की दी चेतावनी

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर अचानक मुफ्त पार्किंग की सुविधा बंद किए जाने से रेल कर्मचारियों के बीच जबरदस्त नाराजगी और असंतोष का माहौल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए नियम के लागू होने के बाद सोमवार सुबह से ही स्टेशन पर पार्किंग स्टाफ और रेल कर्मियों के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थितियां देखने को मिल रही हैं। इस फैसले से नाराज कर्मचारियों ने एकजुट होकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। हालांकि, विवाद को शांत करने के लिए फिलहाल रेल कर्मचारियों को पार्किंग फीस में 50 प्रतिशत की छूट (हाफ चार्ज) देने की बात कही जा रही है, लेकिन कर्मचारी इसे पूरी तरह मुफ्त रखने की मांग पर अड़े हैं।

New Delhi अधिकारियों से गुहार बेकार, ‘ऊपर’ से लिया गया है फैसला

परेशान रेल कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में कभी भी ड्यूटी के दौरान गाड़ी खड़ी करने के लिए पार्किंग शुल्क नहीं दिया है, इसलिए अचानक पैसे मांगना गलत है। इस समस्या को लेकर कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे के उच्चाधिकारियों से भी मुलाकात की और शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्हें वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों से पार्किंग चार्ज वसूलने का यह निर्णय मंडल स्तर (Divisional Level) पर नीतिगत रूप से लिया गया है। ऐसे में इस व्यवस्था में कोई भी बदलाव या राहत केवल मंडल कार्यालय के आदेश के बाद ही संभव है।

New Delhi दिल्ली के अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी लागू हो सकता है यह नियम

रेलवे कर्मचारियों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होने वाली हैं। दिल्ली रेल मंडल के वाणिज्यिक विभाग के अधिकारियों से मिले संकेतों के अनुसार, हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर आजमाया जा रहा यह फॉर्मूला आने वाले दिनों में दिल्ली के अन्य बड़े रेलवे स्टेशनों (जैसे नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और आनंद विहार) पर भी लागू किया जा सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो रोजाना 8 से 12 घंटे की लंबी शिफ्ट करने वाले रेल कर्मचारियों पर आर्थिक रूप से भारी बोझ पड़ना तय है। हर महीने पार्किंग के मद में उन्हें अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा, जिससे रेल यूनियनों और प्रबंधन के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।

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