रिपोर्टर: संजीव कुमार शर्मा
Bokaro : झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर राज्य का सियासी पारा चढ़ने लगा है। चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होते ही राजनीतिक दलों के भीतर दावेदारी और जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में एनडीए (NDA) की प्रमुख सहयोगी पार्टी ‘आजसू’ (AJSU) के केंद्रीय महासचिव और विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने एक बड़ा बयान देकर हलचल तेज कर दी है। उन्होंने मांग की है कि इस बार राज्यसभा के लिए झारखंड की माटी से जुड़े किसी स्थानीय चेहरे को ही उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए।
Bokaro झारखंड के मूल हितों की रक्षा के लिए ‘माटी के लाल’ पर भरोसा जरूरी
बोकारो में मीडिया से बात करते हुए आजसू नेता डॉ. लंबोदर महतो ने ‘माटी की बात’ पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास, यहाँ की संस्कृति और स्थानीय मुद्दों को देश के सबसे बड़े सदन (उच्च सदन) में मजबूती से उठाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि उम्मीदवार यहीं की मिट्टी से उपजा हो। आजसू पार्टी शुरू से ही स्थानीयता और झारखंडियों के अधिकारों की बात करती रही है, ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर उनका यह बयान एनडीए के भीतर सीटों के चयन को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
Bokaro जीत के लिए चाहिए 27 विधायकों का साथ, दोनों सीटों पर एनडीए की फतह का दावा
डॉ. महतो ने गणितीय समीकरणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्यसभा की सीट सुरक्षित करने के लिए एनडीए गठबंधन को 27 विधायकों के मतों की आवश्यकता है। वर्तमान विधानसभा के आंकड़ों के लिहाज से रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि आजसू पार्टी एनडीए धर्म का पूरी तरह पालन करेगी। हमारी पुरजोर कोशिश और इच्छा यही है कि दोनों ही सीटों पर एनडीए के प्रत्याशी शानदार जीत दर्ज कर संसद पहुंचें।
Bokaro आजसू का एक-एक वोट महत्वपूर्ण, गठबंधन के भीतर मंथन तेज
झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में आजसू पार्टी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विधानसभा में आजसू के विधायकों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन राज्यसभा जैसे कड़े मुकाबले में एक-एक वोट की कीमत निर्णायक हो जाती है। डॉ. लंबोदर महतो के इस बयान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और एनडीए के शीर्ष नेता उम्मीदवारों के चयन में ‘माटी के बेटे’ वाले इस फॉर्मूले को कितनी तवज्जो देते हैं।

