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रिपोर्टर: रूपेश कुमार दास

Hazaribagh : झारखंड का हजारीबाग जिला इन दिनों अवैध खनन और उसकी बेखौफ तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है। विशेषकर बड़कागांव प्रखंड, जो अपनी वैध कोयला खदानों के लिए जाना जाता है, अब अवैध कोयला और बालू के काले कारोबार का मुख्य केंद्र बन चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में दिन-रात बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संपदा की लूट मची है, लेकिन जिम्मेदार महकमे इस पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय महज औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।

Hazaribagh जान जोखिम में डालकर बाइक पर एक टन कोयला: पेट पालने की मजबूरी या संगठित खेल?

बड़कागांव थाना क्षेत्र में अवैध कोयले की ढुलाई का तरीका बेहद चौंकाने वाला है। यहाँ न सिर्फ भारी ट्रकों और हाईवा के जरिए कोयला पार किया जा रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक भी इस धंधे में शामिल हैं। कई बाइक सवार अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालकर मोटरसाइकिल पर एक-एक टन तक कोयला लादकर सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। इस खतरनाक काम में लगे लोग इसे पेट पालने की आर्थिक विवशता बताते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है।

Hazaribagh नदियों का सीना चीरकर ओवरलोड बालू का परिवहन, रात होते ही बढ़ती है रफ्तार

इलाके में सिर्फ कोयले की ही लूट नहीं हो रही, बल्कि बालू माफिया भी समान रूप से सक्रिय हैं। बड़कागांव प्रखंड के विभिन्न गांवों में घरों के बाहर ओवरलोड बालू से लदे ट्रैक्टरों का जमावड़ा बेहद आम हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, सूरज ढलते ही इस अवैध कारोबार की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। पूरी रात तेज रफ्तार हाईवा और ट्रैक्टरों की आवाजाही से ग्रामीण न सिर्फ परेशान हैं, बल्कि हादसों का डर भी बना रहता है।

Hazaribagh चार थानों की सीमा पार करता है ‘काला सोना’, मिलीभगत की आशंका

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कानून व्यवस्था पर उठता है। बताया जा रहा है कि अवैध कोयले से लदे यह वाहन बड़कागांव थाना क्षेत्र से निकलने के बाद कटकमदाग थाना, हजारीबाग शहर के कोर्रा थाना और मुफ़्सिल थाना क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। पुलिस मुख्यालय और लगातार होने वाली पुलिस पेट्रोलिंग के बावजूद इन तस्करों का बेखौफ निकल जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में चर्चा है कि कथित रूप से अवैध वसूली और आपसी मिलीभगत के कारण इन वाहनों को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ यानी खुली छूट मिली हुई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर कब कोई बड़ी कार्रवाई करता है।

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