रिपोर्टर: गनेश सिंह
Haridwar : उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त और संवेदनशील बनाने के लिए कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अतुल प्रताप ने पंचायत प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ एक अहम वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर की सभी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही मुस्तैदी से किया जाए, ताकि आम जनता को अपनी छोटी-मोटी शिकायतों के लिए जिला मुख्यालय या शासन के चक्कर न काटने पड़ें।
Haridwar 25 मिनी सचिवालयों के प्रतिनिधि बैठक से जुड़े, जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
इस डिजिटल समीक्षा बैठक में जिले के 25 मिनी सचिवालयों के ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, एडीओ (पंचायत), ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सहित विभिन्न विभागों के जमीनी कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल हुए। डीपीआरओ ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण स्तर पर ही जनता की शिकायतों के निवारण (Grievance Redressal) की एक सुदृढ़ और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की जाए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जनता के प्रति अपने दायित्वों को समझें और मौके पर ही राहत पहुंचाना सुनिश्चित करें।
Haridwar ‘राष्ट्र निर्माण केंद्र’ के रूप में निखरेंगे मिनी सचिवालय, बच्चों को मिलेगी नैतिक शिक्षा
जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप ने एक नया विजन साझा करते हुए कहा कि गांवों में स्थित मिनी सचिवालयों को सिर्फ प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें अब “राष्ट्र निर्माण केंद्र” के रूप में और अधिक जीवंत व सक्रिय बनाया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए मूल्य आधारित (नैतिक) शिक्षा और विभिन्न रचनात्मक व बौद्धिक गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को सही दिशा मिल सके।
Haridwar हर सोमवार को अनिवार्य होगी जनसुनवाई, लिखित-मौखिक शिकायतों का बनेगा डिजिटल/भौतिक रिकॉर्ड
पारदर्शिता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए डीपीआरओ ने आदेश दिया है कि प्रत्येक सोमवार को पंचायतों में आयोजित होने वाले जनसुनवाई कार्यक्रम का पूरा लेखा-जोखा रखा जाए। इसके लिए सभी केंद्रों पर एक ‘शिकायत रजिस्टर’ अनिवार्य रूप से मेंटेन किया जाएगा। इस रजिस्टर में ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई लिखित और मौखिक दोनों ही प्रकार की समस्याओं का पूरा विवरण और उनके निराकरण की स्थिति दर्ज होगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाना और लोगों की समस्याओं का ऑन-स्पॉट समाधान करना है।

