By: Ravindra Singh
Ayurvedic remedies for cough : बदलते मौसम में वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और बुखार के साथ गले में खराश, दर्द और लगातार खांसी की समस्या भी देखने को मिलती है। कई लोगों में बुखार ठीक होने के बाद भी कुछ दिनों तक खांसी, गले में चुभन, सूखापन या बलगम जैसी परेशानी बनी रह सकती है।

अगर गले में कुछ अटका हुआ महसूस हो, निगलने में परेशानी हो, आवाज भारी हो गई हो या लगातार खांसी आ रही हो, तो यह गले में जलन या संक्रमण से जुड़ा लक्षण हो सकता है। आयुर्वेद में गले को आराम देने के लिए कुछ पारंपरिक उपाय बताए गए हैं। हालांकि, तेज या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
गले के संक्रमण में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं?
Ayurvedic remedies for cough गले में संक्रमण या जलन होने पर हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इनमें ये समस्याएं शामिल हो सकती हैं:
- गले में खराश या जलन
- गले के पीछे बलगम या म्यूकस जमा होना
- टॉन्सिल में सूजन या दर्द
- आवाज में भारीपन या बदलाव
- खांसी और बुखार
- गले में सूखापन
- गर्दन या जबड़े के आसपास दर्द
- सिरदर्द
- खाना या पानी निगलने में परेशानी
कई बार गले की परेशानी के साथ नाक और सांस से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इसलिए लगातार लक्षण बने रहने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

आयुर्वेद में गले के लिए बताई गई जड़ी-बूटियां
Ayurvedic remedies for cough आयुर्वेदिक ग्रंथों में गले से जुड़ी तकलीफों के लिए कई औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। इनमें मुलेठी, तुलसी, सारिवा, विदारीकंद और द्राक्षा जैसी औषधियों को पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है।

गले में खराश या जलन होने पर मुलेठी और तुलसी का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक घरेलू नुस्खों में किया जाता है। हालांकि, किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का नियमित या अधिक मात्रा में सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
गरारे करना हो सकता है मददगार
गले में खराश होने पर गुनगुने पानी से गरारे करना एक आसान घरेलू उपाय है। इससे गले में जमा म्यूकस को साफ करने और असहजता कम करने में मदद मिल सकती है।
हल्दी और नमक के पानी से गरारे
एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में हल्दी और एक चुटकी नमक मिलाकर गरारे किए जा सकते हैं। इसे दिन में 2 से 3 बार करने से गले की खराश में अस्थायी राहत मिल सकती है।
ध्यान रखें कि गरारे करने वाले पानी को निगलना नहीं चाहिए।
मुलेठी से गले को मिल सकती है राहत
मुलेठी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से गले की खराश और आवाज से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। थोड़ी मात्रा में मुलेठी पाउडर का सेवन कुछ लोग शहद के साथ करते हैं।
हालांकि, मुलेठी हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। खासकर लंबे समय तक या अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
तुलसी-अदरक का गर्म काढ़ा
गले में खराश और सर्दी-जुकाम के दौरान गर्म पेय गले को आराम पहुंचा सकते हैं। इसके लिए पानी में कुछ तुलसी के पत्ते, थोड़ा अदरक और 1-2 काली मिर्च डालकर उबाल सकते हैं। इसे हल्का गुनगुना होने पर पिया जा सकता है।
बहुत गर्म पेय पीने से गले में जलन बढ़ सकती है, इसलिए इसे पीने से पहले तापमान का ध्यान रखें।
गले को स्वस्थ रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
Ayurvedic remedies for cough गले की परेशानी के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें और शरीर को आराम दें। धूम्रपान या धुएं के संपर्क से बचना भी जरूरी है। बहुत ज्यादा ठंडे या अत्यधिक मसालेदार खाद्य पदार्थों से परेशानी बढ़ती हो तो कुछ समय इनके सेवन से बचें।
इसके अलावा आवाज पर ज्यादा जोर न डालें और पर्याप्त नींद लें। कमरे में हवा बहुत शुष्क होने पर नमी बनाए रखना भी गले के लिए आरामदायक हो सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
Ayurvedic remedies for cough अगर गले का दर्द या खांसी लगातार बढ़ रही है, तेज बुखार बना हुआ है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, निगलने में बहुत अधिक दिक्कत है या लक्षण कई दिनों तक ठीक नहीं होते, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
बुखार ठीक होने के बाद लंबे समय तक खांसी बने रहने के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए बार-बार घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय सही कारण का पता लगाना जरूरी है।
नोट: ये उपाय पारंपरिक घरेलू/आयुर्वेदिक देखभाल से संबंधित हैं और चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं। किसी बीमारी, एलर्जी, गर्भावस्था या नियमित दवाओं की स्थिति में आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
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