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By: Ravindra Singh

40 is becoming new 60 : आज के दौर में उम्र और स्वास्थ्य का संबंध पहले जैसा नहीं रह गया है। कई ऐसी बीमारियां, जिन्हें कभी 50-60 की उम्र के बाद आम माना जाता था, अब 30-40 साल के लोगों में भी देखने को मिल रही हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली को लेकर युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, मोटापा और हृदय संबंधी समस्याएं कम उम्र में तेजी से सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति बाहर से फिट और सामान्य वजन का दिखाई देता है, फिर भी उसके शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन मौजूद हो सकता है।

क्यों 40 बन रहा है ‘न्यू 60’?

40 is becoming new 60 विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे केवल बढ़ता वजन जिम्मेदार नहीं है। खान-पान की खराब आदतें, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना और अस्वस्थ जीवनशैली शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

भारत में यह स्थिति खास चिंता का विषय है, क्योंकि यहां अपेक्षाकृत कम उम्र में ही इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। शरीर का सामान्य BMI हमेशा इस बात की गारंटी नहीं देता कि व्यक्ति अंदर से मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ है।

30-40 की उम्र में बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा

1. टाइप-2 डायबिटीज

इंसुलिन रेजिस्टेंस लंबे समय तक रहने पर प्रीडायबिटीज और आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। अब 30 और 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं। खास बात यह है कि दुबले-पतले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है।

शरीर में जमा अतिरिक्त आंतरिक वसा और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

2. फैटी लिवर

फैटी लिवर की समस्या भी अब कम उम्र में दिखाई देने लगी है। लंबे समय तक खराब खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित जीवनशैली इसके जोखिम को बढ़ा सकती है।

यह जरूरी नहीं कि फैटी लिवर केवल अधिक वजन वाले व्यक्ति को ही हो। सामान्य वजन वाले लोगों में भी मेटाबॉलिक कारणों से लिवर में अतिरिक्त फैट जमा हो सकता है।

3. हृदय रोग

हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी युवाओं में चिंता बढ़ा रहा है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में लंबे समय तक बनी सूजन और कुछ अन्य जोखिम कारक कम उम्र में हृदय की समस्याओं की संभावना बढ़ा सकते हैं।

इसी कारण 30-40 की उम्र में भी हार्ट से जुड़ी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

4. हार्मोन से जुड़ी समस्याएं

बदलती जीवनशैली का असर हार्मोनल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। महिलाओं में PCOS जैसी समस्याएं और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर से जुड़ी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। थायरॉइड संबंधी समस्याएं भी कई लोगों को प्रभावित कर रही हैं।

मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और हार्मोनल सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए एक में असंतुलन दूसरे को भी प्रभावित कर सकता है।

5. हाई ब्लड प्रेशर

पहले बढ़ती उम्र के साथ हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक माना जाता था, लेकिन अब युवा वर्ग में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अधिक नमक वाला भोजन, नींद की कमी और अन्य जीवनशैली संबंधी कारक ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकते हैं।

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

सिर्फ पतला दिखना पर्याप्त नहीं

40 is becoming new 60 स्वास्थ्य का आकलन केवल शरीर के वजन या BMI से करना सही नहीं है। किसी व्यक्ति का वजन सामान्य सीमा में होने के बावजूद उसके शरीर में आंतरिक वसा, इंसुलिन रेजिस्टेंस या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और जरूरत के अनुसार अन्य स्वास्थ्य जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

बदलती जीवनशैली पर देना होगा ध्यान

40 is becoming new 60 कम उम्र में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

हालांकि, किसी बीमारी के लक्षण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी बीमारी, डाइट, व्यायाम या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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