रिपोर्टर: नेहा गुप्ता
Arrah : देश की संसद और बिहार की विधान परिषद से लेकर विधानसभा तक भोजपुरी कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद इस समृद्ध भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न किए जाने पर सिने जगत में गहरा असंतोष है। साथ ही, बिहार में फिल्मों की शूटिंग को लेकर सरकारी अनुदान और नीति का अभाव कलाकारों को मायूस कर रहा है। यह बात एक निजी कार्यक्रम के सिलसिले में आरा पहुंचे प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेता अवधेश मिश्रा ने एक विशेष बातचीत के दौरान कही।
Arrah ‘सांसद-विधायक बनने के बाद भी भोजपुरी को नहीं मिला हक’
अवधेश मिश्रा ने कहा कि आज भोजपुरी सिनेमा का दायरा देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर काफी बढ़ चुका है। इसके बावजूद, भाषा को उसका वाजिब सम्मान और संवैधानिक दर्जा न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं तक भोजपुरी जगत के कई बड़े सितारे पहुंचे हैं, फिर भी भाषा की उपेक्षा जारी है। अवधेश मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश-विदेश में करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली इस भाषा की अनदेखी के लिए हम सभी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं और अब हर किसी को एक सुर में आवाज उठाने की आवश्यकता है।
Arrah बिहार को छोड़ अन्य राज्यों में मिल रहा फिल्मों को अनुदान
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के विकास पर चर्चा करते हुए अवधेश मिश्रा ने राज्य सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि बिहार को छोड़कर देश के अन्य राज्य भोजपुरी फिल्मों के निर्माण और वहां की लोकेशन पर शूटिंग करने पर निर्माताओं को भारी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, बिहार जैसी समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाला राज्य अब भी इस सुविधा से अछूता है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं और प्रादेशिक सिनेमा के विकास को धक्का लग रहा है।
‘रग-रग में बसी है भोजपुरी, आखिरी सांस तक करेंगे संघर्ष’
अभिनेता ने भावुक होते हुए कहा कि भोजपुरी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि उनकी जननी है और यह उनके कण-कण तथा रग-रग में बसी हुई है। उन्होंने प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि जब तक उनके शरीर में सांसें हैं, वे भोजपुरी भाषा के मान-सम्मान, उत्थान और इसे आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

