by-Ravindra Sikarwar
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर इलाके में बुधवार रात को एक ऐसी त्रासदी हुई, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। यहां 13 वर्षीय विवेक कश्यप नामक एक किशोर की अचानक मौत हो गई, जो घंटों तक मोबाइल फोन पर लोकप्रिय ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ खेलने के बाद बेहोश हो गया था। परिवार के अनुसार, विवेक को इस गेम की गहरी लत लग चुकी थी, और यह घटना राज्य में पिछले दो महीनों में तीसरी ऐसी दर्दनाक वारदात है, जहां अत्यधिक गेमिंग ने किसी युवा की जान ली हो। यह मामला न केवल मोबाइल गेमिंग की खतरों को उजागर करता है, बल्कि अभिभावकों और विशेषज्ञों के बीच बच्चों की डिजिटल आदतों पर बहस छेड़ रहा है।
घटना की जानकारी देते हुए इंदिरानगर थाना प्रभारी ने बताया कि विवेक मूल रूप से सीतापुर जिले का रहने वाला था और उसके परिवार ने हाल ही में लखनऊ में एक किराए के मकान में प्रवास किया था। विवेक के पिता एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार में विवेक के अलावा एक छोटी बहन भी है। बुधवार की शाम से विवेक अपने कमरे में बंद होकर फ्री फायर गेम खेलने में लीन था। परिवार के सदस्यों के अनुसार, वह लगातार 6-7 घंटे तक बिना रुके गेम खेलता रहा, जिसमें खाना-पीना भी भूल गया। रात करीब 11 बजे जब उसकी बहन ने कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो विवेक ने कोई जवाब नहीं दिया। बहन ने सोचा कि वह सो गया होगा, लेकिन जब कई घंटों बाद भी कोई हलचल न दिखी, तो परिवार ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। विवेक बिस्तर पर बेहोश पड़ा था, और उसके हाथ में मोबाइल फोन अभी भी चालू अवस्था में था, जहां गेम का स्क्रीन चमक रहा था।
परिवार तुरंत विवेक को नजदीकी निजी अस्पताल ले गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने संदेह जताया कि यह ‘सडन गेमर डेथ’ (अचानक गेमर की मौत) का मामला हो सकता है, जो लंबे समय तक लगातार गेमिंग से जुड़ी एक दुर्लभ लेकिन घातक स्थिति है। लखनऊ के एक वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार ने बताया, “अत्यधिक गेमिंग से शारीरिक निष्क्रियता, अनियमित सांस लेना, तनाव और हृदय पर दबाव पड़ता है। इससे फुफ्फुसीय अम्बोलिज्म (फेफड़ों में रक्त का थक्का), मस्तिष्क रक्तस्राव या हृदय की अनियमित धड़कन जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। विवेक जैसे किशोरों में यह जोखिम अधिक होता है, क्योंकि उनका शरीर अभी विकसित हो रहा होता है।” डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार करने की सलाह दी, जो स्पष्ट करेगी कि मौत का सटीक कारण क्या था।
परिवार के सदस्यों ने विवेक की गेमिंग आदत पर दुख जताते हुए कहा कि वह पिछले कई महीनों से इस गेम का शौकीन हो गया था। उसके पिता ने बताया, “विवेक स्कूल के बाद सीधे फोन उठा लेता था। हमने कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं मानता था। हमने कभी सोचा नहीं था कि यह लत इतनी घातक साबित होगी।” विवेक की मां भावुक होकर बोलीं, “वह हमारा इकलौता बेटा था। अब घर सूना हो गया है।” पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई संदिग्ध परिस्थिति नहीं मिली, लेकिन परिवार ने गेमिंग कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इंदिरानगर पुलिस ने कहा कि वे मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि गेमिंग इतिहास और कोई अन्य कारक सामने आ सके।
यह घटना उत्तर प्रदेश में गेमिंग से जुड़ी मौतों की बढ़ती संख्या को दर्शाती है। पिछले दो महीनों में यह तीसरा मामला है। अगस्त 2025 में लखनऊ के ही एक अन्य इलाके में 11 वर्षीय बच्चे की मौत गेमिंग सेशन के दौरान ही हो गई थी, जब वह PUBG खेलते हुए बेहोश हो गया। सितंबर में गोपनीयता का एक और केस सामने आया, जहां 15 साल का लड़का फ्री फायर खेलते हुए हृदयाघात से मर गया। विश्व स्तर पर 1982 से अब तक 24 ऐसे मामले दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया से जुड़े हैं। इनमें से पांच मौतें फुफ्फुसीय अम्बोलिज्म से, दो मस्तिष्क रक्तस्राव से और बाकी हृदय संबंधी विफलताओं से हुईं। भारत में मोबाइल गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, खासकर किशोरों में, जहां फ्री फायर जैसे गेम्स की लोकप्रियता चरम पर है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक गेमिंग से मानसिक तनाव, नींद की कमी और शारीरिक थकान बढ़ती है, जो घातक साबित हो सकती है। मनोचिकित्सक डॉ. अनिता शर्मा ने कहा, “बच्चों को गेमिंग के समय सीमा तय करनी चाहिए। अभिभावक स्क्रीन टाइम मॉनिटर करें और परिवार के साथ समय बिताने को प्रोत्साहित करें। सरकार को गेमिंग ऐप्स पर उम्र सीमा और चेतावनी लागू करनी चाहिए।” हाल ही में संसद ने ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने वाले बिल को पारित किया है, जो लत और वित्तीय नुकसान को रोकने का प्रयास करता है। साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता बच्चों के फोन उपयोग पर नजर रखें, बैंक खातों को सुरक्षित करें और डिजिटल सीमाएं तय करें।
यह दुखद घटना न केवल एक परिवार का नुकसान है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है। विवेक की मौत ने मोबाइल गेमिंग के छिपे खतरे को सामने ला दिया है, और अब जरूरी है कि जागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग #StopGamingAddiction जैसे हैशटैग के साथ अभियान चला रहे हैं। यह मामला बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल दुनिया के संतुलन पर पुनर्विचार करने का समय है।
