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रिपोर्टर: मनोज साहू

Balaghat : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले अंतर्गत बैहर विधानसभा के दक्षिण बैहर क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। जगला गांव में विभिन्न बीमारियों के कारण 4 बच्चों की जान जाने का मामला सामने आया है, लेकिन प्रशासनिक दस्तावेजों में इन मौतों का कोई दर्ज ब्योरा नहीं होने का गंभीर आरोप लगा है। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 1 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रभावित आदिवासी इलाकों का जायजा लेने पहुंचे थे।

सरकारी आंकड़ों और कांग्रेस के दावों में 11 मौतों का बड़ा अंतर

Balaghat दक्षिण बैहर क्षेत्र में फैली बीमारियों से हुई मौतों की संख्या को लेकर शासन और विपक्ष आमने-सामने हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार अब तक 32 मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय कांग्रेस विधायक संजय उइके का दावा है कि पिछले पांच महीनों में यह संख्या 43 तक पहुंच चुकी है। विधायक ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अब तक केवल 32 पीड़ित परिवारों को ही आर्थिक सहायता दी है, जबकि बाकी 11 प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि दिए जाने का इंतजार है।

राहुल गांधी के दौरे में खुला जगला गांव का मामला, सर्वे के दावों पर सवाल

Balaghat 1 अक्टूबर को राहुल गांधी जब दक्षिण बैहर के जगला गांव पहुंचे, तब ग्रामीणों ने सीधे उनसे बातचीत में बीमारी से हुई 4 बच्चों की मौत की बात कही। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास इन मौतों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं था। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य अमले द्वारा किए जा रहे घर-घर सर्वे और स्वास्थ्य जांच के दावों की पोल खुल गई है। विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं कि लगातार निगरानी के बावजूद इन बच्चों की पहचान और इलाज समय रहते क्यों नहीं हो सका?

बैगा और गोंड बहुल क्षेत्र में फैला प्रकोप, आंकड़ों पर उठी पारदर्शिता की मांग

Balaghat दक्षिण बैहर का यह इलाका विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा और गोंड समुदाय बाहुल्य है, जहाँ दुर्गम रास्तों और संसाधनों की कमी के कारण समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना चुनौती बना हुआ है। पिछले तीन महीनों से यहाँ मलेरिया, खसरा (मीजल्स) और अन्य मौसमी बीमारियों का प्रकोप जारी है। अब मुख्य सवाल आंकड़ों की सत्यता का है—क्या मौतों की संख्या 32 है या 43? विपक्ष का कहना है कि प्रभावित गांवों में एक निष्पक्ष सर्वेक्षण कराया जाए ताकि किसी भी पीड़ित परिवार को सरकारी राहत से वंचित न रहना पड़े।

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