Premanand Maharaj:रसिक दुलारी शरण से जुड़े खुदकुशी मामले की पुलिस जांच जारी है। इसी बीच केलिकुंज आश्रम की ओर से कहा गया है कि वह पूरे मामले की जांच में पुलिस प्रशासन को सहयोग कर रहा है। आश्रम से जुड़े लोगों ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारी या अपुष्ट दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।
अनुज चौधरी को लेकर आश्रम की सफाई
Premanand Maharaj:आश्रम से जुड़े बयान के मुताबिक, अनुज चौधरी ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी, लेकिन वह केलिकुंज आश्रम में रह नहीं रहा था। बताया गया है कि दीक्षा के बाद पिछले करीब तीन महीनों से वह बरसाना स्थित लाड़ली दास आश्रम में रह रहा था।
ऐसे में मामले को केलिकुंज आश्रम से जोड़कर किए जा रहे दावों को लेकर आश्रम की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
नोएडा की युवती के लापता होने की चर्चा
इस बीच नोएडा की एक युवती के लापता होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि युवती 15 अगस्त को प्रेमानंद महाराज से मिलने की बात कहकर घर से निकली थी, जिसके बाद उसका पता नहीं चला।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि युवती केलिकुंज आश्रम पहुंची थी या वह वहां मौजूद थी। इसलिए उसके लापता होने के मामले को आश्रम से जोड़ने वाले दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
हाल की घटनाओं से आहत है आश्रम प्रबंधन
Premanand Maharaj:राधा केलिकुंज ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि हाल की घटनाओं से प्रेमानंद महाराज और आश्रम से जुड़े संत व अनुयायी दुखी हैं। ट्रस्ट ने संबंधित साधक के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की है।
आश्रम प्रबंधन ने कहा कि पुलिस प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और ट्रस्ट की ओर से जांच में आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि जांच पूरी होने तक अफवाहों और अधूरी जानकारी को आधार बनाकर प्रेमानंद महाराज या आश्रम की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बातें न फैलाएं।
आश्रम में कुछ बदलावों की भी चर्चा
Premanand Maharaj:बिना पुष्टि वाले आरोपों के बीच केलिकुंज आश्रम में कुछ व्यवस्थाओं में बदलाव किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इनमें दर्शन और दीक्षा प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा आश्रम में रहने वाले साधक-साधिकाओं के लिए पहले से लागू विशेष पोशाक व्यवस्था में बदलाव की चर्चा है। पहले साधक सफेद मार्किन का कपड़ा और पीला अचला पहनते थे, जबकि अब सामान्य कपड़ों या कुर्ता-पायजामा में दिखाई देने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन बदलावों को लेकर आश्रम की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। टोकन आधारित दर्शन और यमुना विहार कुंज बेलवन में दीक्षा प्राप्त भक्तों के प्रवेश को लेकर भी रोक की जानकारी सामने आई है।
प्रेमानंद महाराज से दीक्षा की प्रक्रिया क्या है?
Premanand Maharaj:प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने की प्रक्रिया में पहले आश्रम जाकर मिलने के लिए टोकन लेने की बात बताई जाती है। टोकन में निर्धारित समय के अनुसार संत से मुलाकात होती है। इस दौरान साधक से दीक्षा लेने की इच्छा और उसके पीछे के कारणों के बारे में जानकारी ली जाती है।
दीक्षा के बाद साधक के जीवन और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं। आश्रम से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पहली बार नाम दर्ज होने के बाद दीक्षा कार्ड बनाया जाता है और साधक को समय-समय पर आश्रम आकर अपनी साधना की स्थिति बतानी होती है।
दीक्षा से पहले परिवार की सहमति का प्रावधान
Premanand Maharaj:बताई गई प्रक्रिया के अनुसार, गृहस्थ व्यक्ति के मामले में पति-पत्नी दोनों की सहमति महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि विवाहित व्यक्ति का जीवनसाथी दीक्षा के लिए सहमत नहीं है, तो दीक्षा नहीं दी जाती।
अविवाहित साधक के लिए माता-पिता की लिखित अनुमति या उनकी मौजूदगी को आवश्यक बताया गया है। वहीं, अविवाहित लड़कियों को विवाह से पहले सामान्य तौर पर दीक्षा नहीं देने की बात भी कही जाती है।
दीक्षा की प्रक्रिया तत्काल पूरी होने के बजाय साधक के आचरण और साधना की निरंतरता के आधार पर लंबी अवधि में पूरी होने की बात कही गई है। इसमें एक से दो साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
फिलहाल रसिक दुलारी शरण मामले और नोएडा की युवती से जुड़े दावों की जांच जारी है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।

