BJP MP Gajendra PatelBJP MP Gajendra Patel
Spread the love

BJP MP Gajendra Patel: मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गजेंद्र पटेल ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जनसंख्या वृद्धि को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ‘हम दो, हमारे पांच’ का नया नारा देते हुए हिंदू समाज के लोगों से कम से कम पांच संतान पैदा करने की अपील की है।

बड़वानी जिला मुख्यालय स्थित कालिका माता मंदिर परिसर में आयोजित एक बैठक के दौरान सांसद पटेल ने यह बात कही। इस बैठक में कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई और पूर्व मंत्री प्रेमसिंह पटेल सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और ग्रामीण मौजूद थे।

जनसंख्या असंतुलन का दिया हवाला

BJP MP Gajendra Patel:सांसद गजेंद्र पटेल ने तर्क दिया कि यदि देश में जनसंख्या का संतुलन नहीं सुधरा, तो भविष्य में हिंदू आबादी अल्पमत में आ सकती है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में हिंदुओं की प्रजनन दर (Birth Rate) 1.9 है, जबकि अन्य समुदायों में यह 2.9 के करीब है। उन्होंने युवाओं से समय पर विवाह करने और देश की सुरक्षा व संस्कृति की रक्षा के लिए आबादी बढ़ाने की चिंता करने का आग्रह किया।

शास्त्र के साथ शस्त्र उठाने की भी सलाह

BJP MP Gajendra Patel:अपने संबोधन में सांसद ने सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू समाज को केवल धार्मिक ग्रंथों (शास्त्र) का ज्ञान ही नहीं होना, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा के लिए हथियारों (शस्त्र) का उपयोग करना भी आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में देवी-देवताओं के एक हाथ में आशीर्वाद तो दूसरे हाथ में शस्त्र भी सुशोभित रहते हैं।

जिम संस्कृति पर उठाए सवाल, अखाड़े बढ़ाने पर जोर

BJP MP Gajendra Patel:सांसद पटेल ने आधुनिक जीवनशैली पर बात करते हुए युवाओं को जिम जाने के बजाय घर पर योग करने और पारंपरिक अखाड़ों से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में जिमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अखाड़े विलुप्त हो रहे हैं। उनके अनुसार, जिम जाने से केवल शरीर का आकार (बॉडी) बनता है, जबकि विपरीत परिस्थितियों में लड़ने और मुकाबला करने की क्षमता अखाड़ों से ही विकसित होती है। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि कठिन समय में केवल सनातनी समाज ही एक-दूसरे के काम आएगा।

read this:-इंदौर में गांधी जयंती पर बेटियों का अनोखा ‘न्यायाग्रह’, जंजीरों में जकड़कर पूछा- सुरक्षा के नाम पर बंदिशें क्यों?