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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के चर्चित मामले में आरोपी शोएब ढेबर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायालय से दोबारा गिरफ्तारी की मंजूरी मिलने के बाद रायपुर पुलिस की विशेष टीमों ने आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन हर जगह पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस अब इस पहलू पर भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या पुलिस की रणनीति और दबिश की गोपनीय जानकारी पहले ही लीक हो रही थी।

छह संभावित ठिकानों पर पुलिस की दबिश, हर बार खाली हाथ लौटी टीम

Raipur एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीमों ने शोएब ढेबर को पकड़ने के लिए शहर के लगभग छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। हालांकि, पुलिस टीम के पहुंचने से चंद मिनट पहले ही आरोपी ठिकाना बदलकर निकल चुका था। लगातार निष्फल हो रही छापेमारी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को संदेह है कि कार्रवाई की सूचना आरोपी या उसके करीबियों तक पहले ही पहुंचाई जा रही थी। अब पुलिस राज्य के बाहर भी उसकी तलाश में टीमें भेजने की योजना बना रही है।

25 करोड़ और 50 करोड़ की फिरौती मामलों में घिरे हैं शोएब ढेबर

Raipur आनंद कुकरेजा को एक विदेशी नंबर से कॉल कर 25 करोड़ रुपये की धमकी देने के मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर शोएब ढेबर की भूमिका उजागर हुई थी। पूर्व में जमानत मिलने के बाद पुलिस ने नए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट से पुनः गिरफ्तारी की अनुमति प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त, 50 करोड़ रुपये की एक अन्य कथित फिरौती के मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग के नाम पर धमकी देने की बात सामने आई थी, जिसमें पुलिस शोएब की भूमिका की पड़ताल कर रही है। बता दें कि शोएब ढेबर, शराब और कोयला घोटाला मामलों में आरोपी अनवर ढेबर के पुत्र तथा पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भतीजे हैं।

सूचना लीक होने का संदेह, ACCU के दो आरक्षक लाइन अटैच

Raipur छापेमारी की रणनीति उजागर होने की आशंका के बीच पुलिस महकमे के भीतर हलचल तेज हो गई है। इसी घटनाक्रम के दौरान ACCU में पदस्थ दो आरक्षकों, शिवम द्विवेदी और राहुल सिंह गौतम को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई के विस्तृत कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे विभागीय स्तर पर सूचना लीक होने की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

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