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रिपोर्टर: रतन कुमार

Jamtara : ऐतिहासिक गांधी मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में जिला स्तरीय भव्य समारोह का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में पूरे जिले से हजारों की संख्या में लोग अपनी पारंपरिक पोशाक में पहुंचे। सिद्धू-कानू मुर्मू सेवा समिति, मांझी परगना सरदार महासभा और झामुमो सहित कई सामाजिक संगठनों ने एक मंच पर आकर समाज की एकजुटता का परिचय दिया।

Jamtara वीर शहीदों को श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

समारोह की शुरुआत अमर शहीद सिद्धू-कानू की प्रतिमा पर माल्यार्पण और समाज के अन्य महानायकों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद मंच से प्रस्तुत हुए पारंपरिक आदिवासी लोकगीतों और नृत्यों ने पूरे मैदान को उमंग से भर दिया। कार्यक्रम की महत्ता को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

Jamtara मूलवासी पहचान और संस्कृति के संरक्षण पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आनंद टुडू ने आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज की अपनी अनूठी परंपराएं और जीवनशैली हैं, जिनका सम्मान होना आवश्यक है। उन्होंने आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस वर्ग को अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ ही देखा जाना चाहिए।

जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता का संदेश

वहीं, वक्ता सुनील हांसदा ने अपने संबोधन में जल-जंगल-जमीन के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और कुरीतियों के उन्मूलन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी को अपने संवैधानिक अधिकारों और समृद्ध विरासत के प्रति जागरूक करना समय की मांग है। कुल मिलाकर, गांधी मैदान में आयोजित यह समारोह आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामूहिक एकता की एक सशक्त मिसाल साबित हुआ।

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