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रिपोर्टर: नेहा गुप्‍ता

Arrah : बिहार के भोजपुर (आरा) जिले के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत बिलौटी गांव में हाल ही में पुलिस कार्रवाई के दौरान मारे गए भरत भूषण तिवारी के आवास पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाकपा-माले (CPI-ML) के सांसद सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। वामपंथी नेताओं ने इस पूरी घटना को “ठंडे दिमाग से की गई हत्या” करार देते हुए नीतीश सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

Arrah आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप, परिजनों को बंधक बनाने का दावा

सांसद सुदामा प्रसाद और माले नेताओं की टीम ने मृतक के परिजनों से मिलकर घटना की विस्तृत जानकारी ली। भरत तिवारी के पिता ने आरोप लगाया कि उनका बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) था और उन्होंने सुबह ही पुलिस से उसे अस्पताल भेजने की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस ने उल्टा उन्हें ही बंधक बना लिया। परिजनों का दावा है कि भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। नेताओं ने कहा कि घटनास्थल से गवाहों को हटाकर एक दिव्यांग व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई भी की गई, जिससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत होती है।

Arrah जनहित के मुद्दे उठाने पर उपेक्षा और मानसिक तनाव का शिकार

सांसद सुदामा प्रसाद ने बताया कि भरत भूषण तिवारी क्षेत्र के विभिन्न जनहित के मुद्दों, विशेषकर जवानिया गांव के कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के सवाल को लेकर लगातार मुखर थे। वे इस संबंध में कई बार अधिकारियों को मांग-पत्र भी सौंप चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा लगातार की गई उपेक्षा के कारण वे मानसिक तनाव का शिकार हो गए थे। माले नेता ने कहा कि भरत का तरीका भले ही गलत रहा हो, लेकिन जवानिया के विस्थापितों को बसाने की उनकी मांग बिल्कुल जायज थी, जिसे भाकपा-माले ने लोकसभा में भी उठाया था।

Arrah 50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग

भाकपा-माले ने बिहार सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में इस समय ‘बुलडोजर और एनकाउंटर राज’ चलाया जा रहा है। सांसद ने कहा कि महज कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देने से प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। माले जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
  • मृतक भरत भूषण तिवारी के आश्रितों को ₹50 लाख का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दी जाए।
  • जवानिया गांव के विस्थापितों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर उन्हें समुचित रूप से बसाया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नेता: सांसद सुदामा प्रसाद, केंद्रीय कमेटी सदस्य अभ्युदय, प्रखंड सचिव हरेंद्र सिंह, आइसा जिला सचिव जयशंकर कुमार, आरवाईए जिला सचिव निरंजन कुमार केसरी और चंदन कुमार।

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