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रिपोर्टर: नेहा गुप्‍ता

Arrah : बिहार के भोजपुर जिले का प्रमुख आरा रेलवे स्टेशन इन दिनों यात्रियों की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर रील्स (Reels) बनाने वालों की मनमानी के कारण चर्चा में है। आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मशहूर होने का भूत युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसी सनक में नियमों को ताक पर रखकर आरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर युवक-युवतियों द्वारा खुलेआम वीडियो शूट करने का एक नया मामला सामने आया है, जिसने रेलवे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

Arrah यात्रियों के सामने भोजपुरी गानों पर फूहड़ता, नियमों की सरेआम धज्जियाँ

सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कुछ युवक और युवतियां बिना किसी डर या कानूनी खौफ के रेलवे प्लेटफॉर्म पर सरेआम रील बना रहे हैं। यात्रियों की भारी भीड़ के बीच लाउड म्यूजिक और भोजपुरी के फूहड़ गानों पर अश्लील डांस स्टेप्स किए जा रहे हैं। स्टेशन जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थल पर इस तरह की हरकतें न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं, बल्कि यह रेलवे के कड़े नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

Arrah आरपीएफ और जीआरपी की मुस्तैदी गायब, यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़

किसी भी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों और रेल संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा राजकीय रेल पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कंधों पर होता है। लेकिन इस घटना के दौरान सुरक्षाकर्मी दूर-दूर तक नजर नहीं आए।

प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बिना अनुमति के वीडियो शूट होना और सुरक्षाबलों का नदारद रहना यह दर्शाता है कि आरा जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर हो चुकी है। ऐसे में यदि कोई अप्रिय घटना या बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? रील बनाने के चक्कर में पहले भी कई स्टेशनों पर हादसे हो चुके हैं, इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में नाकाम दिख रहा है।

Arrah वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन, आरपीएफ इंस्पेक्टर ने दिए जांच के आदेश

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल होने और चौतरफा फजीहत के बाद अब रेलवे प्रशासन हरकत में आया है। इस पूरे मामले को लेकर आरा के आरपीएफ (RPF) इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और वीडियो में दिख रहे रीलबाजों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इन हुड़दंगियों पर कब तक और क्या शिकंजा कसा जाता है, ताकि भविष्य में रेलवे स्टेशनों को रील बनाने का अड्डा बनने से रोका जा सके।

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