रिपोर्टर: ईशु प्रसाद
Kolkata : पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में नगरपालिकाओं के अध्यक्ष (चेयरमैन) या पंचायत प्रधान जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर पाएंगे। फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए यह जिम्मेदारी अब पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों को सौंप दी गई है।
Kolkata फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद सरकार का बड़ा फैसला
राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जानकारी दी कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अन्य जांचों के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने की शिकायतें मिली थीं। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर कई लोगों द्वारा सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का अवैध लाभ उठाने की बात सामने आई है। इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग जल्द ही अधिकृत अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए नई अधिसूचना जारी करेगा।
1997 से अब तक के सभी प्रमाण पत्रों की होगी दोबारा जांच
पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बंगाल सरकार वर्ष 1997 से लेकर अब तक दर्ज किए गए सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों का पुनर्मूल्यांकन (री-वेरिफिकेशन) करेगी। इसके बाद एक एकीकृत साझा डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा ताकि वास्तविक लोगों को वैध प्रमाण पत्र मिल सकें और फर्जी दस्तावेजों को रद्द किया जा सके।
पुलिस की राज्यव्यापी कार्रवाई, केवल पक्के कर्मचारियों को मिलेगी जिम्मेदारी
नियमों में सख्ती लाते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रमाण पत्र जांच या जारी करने का काम केवल नियमित सरकारी अधिकारी ही करेंगे; किसी भी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारी को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इधर, राज्यभर में फर्जी प्रमाण पत्रों के नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने विभिन्न नगरपालिकाओं और पंचायत दफ्तरों में छापेमारी कर रजिस्टरों और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है।

