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Motherhood : सनातन संस्कृति में माता का स्थान सर्वोपरि रहा है। हमारी परंपरा में माँ को केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि माता के समान कोई छाया नहीं, कोई गति नहीं, कोई रक्षक नहीं और माता के समान कोई प्रिय नहीं है। यद्यपि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव स्वरूप ‘मदर्स डे’ मनाने का प्रचलन बढ़ा है, किंतु मूल उद्देश्य माँ के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करना ही है।


Motherhood सृष्टि की रचयिता: विधाता का जीवंत रूप

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो विधाता की इस सृष्टि को अपने वात्सल्य से नया आकार देती है। चाहे वह सूक्ष्म अणु हो या अनंत नक्षत्र, समस्त जीव प्रजातियों और लोक-लोकान्तरों के अस्तित्व के पीछे सृजन की वही शक्ति निहित है जिसे हम ‘माँ’ कहते हैं। वह वास्तव में धरती पर ईश्वर का साक्षात प्रतिरूप है, जो निस्वार्थ भाव से जीवन का पोषण करती है।

Motherhood प्रेम और संवेदना का महासागर

‘माँ’ शब्द में जो मिठास, आत्मीयता और गहराई छिपी है, वह किसी अन्य शब्द में दुर्लभ है। यह केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संवेदनाओं और अहसासों की एक अविरल धारा है। संसार में प्रेम के जितने भी रूप विद्यमान हैं, उन सबका मूल उद्गम ‘मातृत्व’ ही है। माँ का हृदय प्रेम की वह पराकाष्ठा है जहाँ पहुँचकर त्याग और सेवा के अर्थ पूर्ण होते हैं।

Motherhood अनमोल मातृत्व को सादर नमन

संतान के प्रति माँ का स्नेह एक दिव्य और स्वर्गीय अनुभूति है, जिसे शब्दों की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता। माँ की ममता का आँचल वह सुरक्षित स्थान है जहाँ दुनिया की हर चिंता समाप्त हो जाती है। आज के इस विशेष अवसर पर, हम समस्त जगत की माताओं के उस अनूठे और अनमोल मातृ-भाव को प्रणाम करते हैं। उनके असीम धैर्य और करुणा को कोटि-कोटि नमन।