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वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल

Editorial : हम लेखक बदनसीब हैं और प्रीतम खुशनसीब. हम निर्दलीय हैं और प्रीतम भाजपा के विधायक भी हैं और ऊपर से लोधी. वो भी पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के मुंह बोले भाई. सो प्रीतम सुर्खियों में हैं. प्रीतम को सुर्खियों में ले आई उनकी साफगोई.

प्रीतम को हम तब से जानते हैं जब उनकी जरूरत पुलिस को आए दिन पडती थी. प्रीतम उस जलालपुर के रहने वाले हैं जो कभी ग्वालियर पुलिस थाने का हिस्सा था. जलालपुर वाले प्रीतम का इलाका और थाने बदलते रहे लेकिन प्रीतम नही बदले. आज भी पिछोर से भाजपा के विधायक बनने के बाद भी प्रीतम पहले वाले ही प्रीतम हैं. उनका भाजपा की गाय और गोबर से गहरा रिश्ता है.

प्रीतम प्यारे आजकल अपने बेटे की वजह से सुरखियों में है. प्रीतम के बेटे के पास थार है और थार का काम है लोगों को कुचलना. प्रीतम के बेटे की थार ने भी पांच लोगों को कुचला, मरा कोई नहीं. लेकिन मामला पुलिस तक पहुचना था सो पहुंचा. पहले पुलिस ने ना-नुकुर की लेकिन जब प्रीतम सुत का वीडयो वायरल हुआ तो पुलिस ने संज्ञान लिया.

संज्ञान तो प्रीतम प्यारे ने भी लिया. खुद बेटे को, बेटे की थार को थाने भिजवाया. मामला दर्ज कराया. बेटे की जमानत भी कराई. किंतु जब एसडीओपी साहब ने प्रीतम प्यारे के बेटे को पुलिसिया अंदाज में हडकाते हुए चेतावनी दि कि ‘ करैरा में दिखना नहीं’ तो प्रीतम के भीतर का पिता और विधायक एक साथ जाग गए.

प्रीतम प्यारे ने आईपीएस एसडीओपी को सोशल मीडिया पर खुली चेतावनी दी कि उनका बेटा करैरा आएगा और चुनाव भी लडेगा, पुलिस से रोका जाए तो रोक ले. प्रीतम प्यारे ने प्रतिप्रश्न भी किया कि करैरा क्या एसडीओपी के डैडी का है? प्रीतम प्यारे ने एसडीओपी को चेताया है कि यदि एसडीओपी ने माफी न मांगी तो वे अपने 10 हजार कार्यकर्ताओ ं को साथ ले जाकर एसडीओपी का बंगला गोबर से भर देंगे.

मुझे प्रीतम प्यारे की क्षमताओं पर पूरा यकीन है. उनके आंगन में उमा भारती नाच चुकी हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान प्रीतम प्यारे को जिताने के लिए मतदाताओं के सामने झोली फैला चुके है.प्रीतम प्यारे को 2023 के विधानसभा चुनाव में 1.21 लाख से अधिक वोट मिले थे. उन्होंने कांग्रेस के बाहुबली अरविन्द लोधी को करीब 21 हजार से अधिक वोटों से हराया था. जाहिर है कि उनके पास एसडीओपी के बंगले में गोबर भरने के लिए कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है.

हकीकत ये कि पिछले ढाई साल में भाजपा के जितने भी प्रीतम प्यारे हैं उनके टोले ढाई किलो से बढकर ढाई हजार किलो के हो चुके हैं. यानि प्रीतम लोधी केवल पिछोर के विधायक नहीं है बल्कि वे भाजपा के तमाम विधायकों की पहचान हैं. आप भाजपा के किसी भी विधायक का चेहरा गौर से देखिए उसमें प्रीतम ही नजर आएंगे.प्रीतम प्रतीक है सत्ता का. प्रीतम मुखौटा है भाजपा का.

मप्र में भाजपा के पास एक प्रीतम नहीं है, ढेरों प्रीतम हैं चाहे वे विधायक हों या न हों. खंडवा जिले में भाजपा के एक प्रीतम ने तो 5 लोगों को थार से कुचलकर मार ही दिया. मुरेना मे भाजपा के ही प्रीतम थे जिन्होने एक वन रक्षक की जान ले ली. भाजपा के प्रीतम हर डाल पर बैठे हैं. पुलिस कितने प्रीतमों से निबटेगी या उन्हे निबटाएगी? हमारा प्रीतम तो हमारा प्रीतम है. सबसे अलग, सबसे थलग.

मुझे लगता है कि एसडीओपी को सरकार का संरक्षण मिलने वाला नहीं है भले ही वे भापुसे से आते हैं. सरकार बचाएगी तो अंततोगत्वा प्रीतम को ही. आखिर घुटने पेट की ओर ही मुडते हैं. एसडीओपी को करैरा छोडना पडेगा या प्रीतम प्यारे की अधीनता स्वीकार करना पडेगी. चुनाव प्रीतम को नहीं, एसडीओपी को करना है. ये मेरा आकलन है. मुमकिन है कि ये सही न हो. मेरी एसडीओपी के प्रति सहानुभूति है.

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