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वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल

Editorial : महेंद्रा कंपनी के लिए 3 और 5 डोर थार कार भले ही सोने का अंडा देने वाला ब्रांड हो लेकिन इस कार प्रजाति से पूरा देश थरथरा रहा है. भारत की सडकों पर थार अब यमराज का दूसरा नाम हो गया है. आप सडक पर हों या फुटपाथ पर थार आपको कहीं भी कुचल सकती है, थार के पंजे से आपको कोई नहीं बचा सकता.

मप्र में भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी का बेटा हो या खंडवा में सनावद केकिसी दूसरे भाजपा नेता जिसके पास भी थार है वो किसी को भी कुचल कर घायल कर सकता है, मार सकता है. दोनों हादसों में 5 लोग मारे गए जबकि आधा दर्जन घायल हो गए. पुलिस का काम मामला दर्ज करने का है सो वो कर लेती है. लेकिन थार की रफ्तार पर किसी का कोई अंकुश नहीं है.

कलिकाल में थार यमराज का नवीननतम अवतार है. 7 से 18 लाख रुपए में आने वाली थार कार मया तो सत्तारूढ दल के नेताओं और उनके परिजनों के पास हैं या फिर खनन और भू माफिया के पास. ये थार वाले इंसान को कुचलने में रत्तीभर नहीं हिचकते. पुलिस का इन्हे डर नहीं. जानते हैं एक मारो या पांच फांसी नहीं होने वाली. थाने से ही जमानत मिल जाती है.

आप जानकर हैरान होंगे कि नवधनाढ्यों पर थार का ऐसा भूत सवार है कि अब तक 3 लाख से ज्यादा थार कारें बिक चुकी हैं. थार बाहुबली होने का प्रतीक बन चुकी है. इसीलिए नेताओं और गुंडों में थार की बेहद मांग है. देश का शायद ही कोई ऐसा शसर हो जहाँ थार माता मौजूद न हों. बाहुबली तो समझते हैं कि ‘थार नहीं तो जन्म लेना ही बेकार है.

एक जमाने में स्कार्पियो बाहुबलियों की पसंद हुआ करती थी, अब थार ने उसकी जगह ले ली है. मोटे,, चौडे टायर वाली थार अगर काले रंग की है तो उसस जरूर बचकर रहिये. साइड मांगे तो फौरन दे दीजिये. छोटी मोटी खरोंच कर दे तो थार चालक को गुस्से से नहीं मुस्करा कर देखिए. तभी आपकी जान बच सकती है अन्यथा थार वाला आपको दस-पांच किमी पछियाकर भी सबक सिखा सकता है.

भारत में रोजाना सड़क हादसों के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2023 की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक साल में कुल सड़क हादसे: 4,80,583 हुए. यानि रोजाना औसत 1,317 हादसे.रोजाना 474 मौतें यानि एक साल में कुल 1,72,890 मौतें.

रोजाना लगभग 1,268 लोग घायल यानि एक साल में (कुल 4,62,825 घायल.इसका मतलब है हर घंटे लगभग 55 हादसे और 20 मौते..

2024 में संसद में दी गई जानकार के मुताबिक सडक पर मरने वालों की संख्या में हर साल 2.3% का इजाफा हो रहा है.कुल हादसों की संख्या 2024 में लगभग 4.7 से 4.8 लाख के आसपास बताई गई है, यानी रोजाना हादस अभी भी 1,300 के करीब ही हैं।

जब से थार सडक पर आई है तब से राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं कुल हादसों का लगभग 31 प्रतिशत और मौतों का 36 प्रतिशत है. थार का आतंक सबसे ज्यादा तमिलनाडु,उत्तर प्रदेश (मौतों में और मध्य प्रदेश में है.यानि ‘ थार है जहाँ मौत है वहाँ ‘.इसलिए जब भी घर से निकलें तो ईश्वर से प्रार्थना करें कि आपका सामना किसी थार नाम की से न हो.

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