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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Uttarkashi : उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के आगाज के साथ ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। जहाँ एक ओर भक्त मां गंगा और यमुना के दर्शन कर पुण्य कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नदियों के उद्गम स्थल पर बढ़ रही गंदगी ने प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में गंगोत्री धाम में चलाए गए एक वृहद स्वच्छता अभियान के दौरान नदी से भारी मात्रा में कचरा और कपड़े बरामद किए गए हैं।

Uttarkashi आस्था के नाम पर प्रदूषण: नदियों में प्रवाहित हो रहे हैं क्विंटल कपड़े

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के उद्गम क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या सामने आई है। दर्शन के लिए आने वाले कई श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, अपनी आस्था के चलते पुराने वस्त्र और अन्य पूजन सामग्री सीधे नदी की धारा में प्रवाहित कर रहे हैं। यह स्थिति मां गंगा और यमुना के पवित्र जल को उनके उद्गम स्थल पर ही प्रदूषित कर रही है।

इस गंभीर संकट को देखते हुए गंगा विचार मंच ने एक बड़ा कदम उठाया। मंच की टीम ने स्थानीय नगर पंचायत, वन विभाग, गंगोत्री नेशनल पार्क के कर्मचारियों और स्थानीय साधु-संतों के साथ मिलकर एक संयुक्त स्वच्छता अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान नदी के घाटों और जलधारा से करीब 100 बोरे कपड़े और अन्य सामग्री बाहर निकाली गई।

Uttarkashi प्रशासन की सख्ती: जिलाधिकारी ने दिए ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देश

नदियों की स्वच्छता को लेकर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धामों की पवित्रता और सफाई से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

  • सफाई कर्मियों की तैनाती: जिला पंचायत और नगर पंचायतों को धामों में चौबीसों घंटे सफाई कर्मियों की सक्रियता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
  • निगरानी: संवेदनशील घाटों पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि लोग नदी में कपड़े न बहाएं।
  • जागरूकता अभियान: गंगा विचार मंच और जिला गंगा समिति द्वारा बैनर, वॉल पेंटिंग और स्लोगन के जरिए यात्रियों को निरंतर जागरूक किया जा रहा है।

Uttarkashi श्रद्धालुओं से अपील: ‘अपनी आस्था को स्वच्छता से जोड़ें’

प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से भावुक अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों में कपड़े और प्लास्टिक प्रवाहित करना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह जलीय जीवन और पर्यावरण के लिए भी घातक है।

अपील में कहा गया है कि मां गंगा और यमुना को स्वच्छ रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर भक्त की नैतिक जिम्मेदारी है। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी प्रकार की सामग्री नदी में न डालें और कूड़ेदानों का प्रयोग करें। चारधाम यात्रा का पुण्य तभी सार्थक है, जब हम इन पवित्र नदियों की निर्मलता को भी सुरक्षित रखें।

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