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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा जारी ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के लिए कुल 286 शिक्षण पदों—जिनमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर शामिल हैं—को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इस विज्ञापन के अनुसार, इन पदों पर केवल महिला उम्मीदवार ही आवेदन कर सकती हैं, जिससे पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।

याचिका में मुख्य तर्क

जबलपुर के निवासी नौशाद अली सहित अन्य योग्य पुरुष उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट की प्रधान पीठ में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल बघेल ने तर्क दिया कि:

  • भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) के दिशानिर्देशों या भर्ती नियमों में शिक्षण पदों के लिए लिंग आधारित कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन करता है, जो कानून के सामने समानता और सार्वजनिक रोजगार में अवसरों की गारंटी देते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का भी उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि 100 प्रतिशत आरक्षण असंवैधानिक है।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस आरक्षण को असंवैधानिक घोषित किया जाए और उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाए।

कोर्ट में हुई कार्यवाही

हाईकोर्ट की प्रधान पीठ में जस्टिस विशाल धगट के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाल की सुनवाई में एमपीईएसबी की ओर से अधिवक्ता ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने सरकार को इस निर्णय को लिखित रूप में प्रस्तुत करने के लिए एक दिन का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को निर्धारित की। आवेदन की अंतिम तिथि भी 7 जनवरी होने के कारण यह सुनवाई महत्वपूर्ण है।

आगे की संभावना

यह मामला नर्सिंग शिक्षा में लैंगिक समानता के मुद्दे को उठाता है। पहले छत्तीसगढ़ और कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसी तरह के 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अंतिम फैसला इस भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय करेगा और पुरुष नर्सिंग शिक्षकों के लिए नए अवसर खोल सकता है।