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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: जल संरक्षण और संचयन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने देश में अपना लोहा मनवाया है। मंगलवार को विज्ञान भवन में आयोजित छठवें राष्ट्रीय जल पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश के जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं विजेताओं को सम्मानित किया।

उत्तरी क्षेत्र में टॉप-3 पर उत्तर प्रदेश का कब्जा:

  • प्रथम स्थान: मीरजापुर
  • द्वितीय स्थान: वाराणसी (सर्वश्रेष्ठ जिला श्रेणी में भी दूसरा स्थान)
  • तृतीय स्थान: जालौन

मीरजापुर के जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, पूर्व डीएम प्रियंका निरंजन (वर्तमान डीएम गोंडा) और मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार ने राष्ट्रपति के हाथों प्रथम पुरस्कार और ट्रॉफी ग्रहण की। साथ ही मीरजापुर को 2 करोड़ रुपये का नकद इनाम भी मिला।

वाराणसी से जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने दूसरा पुरस्कार लिया, जबकि जालौन के जिलाधिकारी राकेश पांडेय ने तीसरा पुरस्कार प्राप्त किया।

जल संचयन जन-भागीदारी श्रेणी में गोरखपुर तीसरे स्थान पर:
देश के सर्वश्रेष्ठ नगर निकायों की श्रेणी में गोरखपुर नगर निगम ने बाजी मारते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि शहरों में भी जल संचयन के प्रति जागरूकता और कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं।

योगी सरकार की नीतियों का सीधा असर:
ये पुरस्कार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियानों का जीता-जागता प्रमाण हैं। प्रदेश में ‘जल जीवन मिशन’, ‘अटल भूजल योजना’, ‘नमामि गंगे’ और ‘अमृत सरोवर’ जैसी योजनाओं के तहत लाखों जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं।

मीरजापुर की सफलता की कहानी:
मीरजापुर में पिछले दो साल में हजारों तालाबों का गहरीकरण, सोक पिट, चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, समतलीकरण और छोटी नदियों (कर्णावती, लोहंदी आदि) का कायाकल्प किया गया। वर्षा जल संचयन की सैकड़ों नई संरचनाएं बनीं, जिससे भूजल स्तर में औसतन 3 से 5 मीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वाराणसी बना रोल मॉडल:
काशी में 25,000 से ज्यादा रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं बनाई गईं। नदियों-नालों के कायाकल्प के साथ-साथ जन-भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए गए। इन प्रयासों से वाराणसी उत्तर भारत में जल प्रबंधन का आदर्श जिला बन गया।

देश के लिए प्रेरणा:
उत्तर प्रदेश के इन जिलों को मिला राष्ट्रीय सम्मान यह संदेश देता है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और जन-भागीदारी से जल संकट पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है। अन्य राज्य भी अब उत्तर प्रदेश के मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार वितरण के दौरान कहा कि जल संरक्षण आज सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकता है और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य इस दिशा में बाकियों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की इस ऐतिहासिक सफलता पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों, अधिकारी-कर्मचारियों और जनता को बधाई दी है।