3 kilometers on a hilly terrain:छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से कर्तव्यनिष्ठा और जज्बे की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। यहां बारिश के मौसम में दो महिला शिक्षिकाएं हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों का भविष्य संवारने स्कूल पहुंचती हैं। इनमें से एक शिक्षिका कर्मिला टोप्पो अपनी 9 महीने की मासूम बच्ची को गोद में लेकर उफनती नदी पार करती हैं।
क्या है पूरा मामला?
3 kilometers on a hilly terrain:यह प्रेरणादायक घटना बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले धौरपुर गांव की है। यह गांव मोरन और इरिया नदियों के संगम के पास स्थित है। बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ने के कारण यह क्षेत्र मुख्य इलाके से कट जाता है और संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।
इस कठिन परिस्थिति में स्कूल पहुंचने के लिए दोनों शिक्षिकाएं—संध्या हलदार और कर्मिला टोप्पो—अपनी स्कूटी एक निश्चित जगह (मरना) पर पार्क कर देती हैं। इसके आगे कोई सड़क मार्ग नहीं है, इसलिए वे करीब 3 किलोमीटर का पथरीला और पहाड़ी रास्ता पैदल तय करती हैं। इसके बाद कमर तक या उससे भी ज्यादा उफनते पानी वाली नदी को पार करके वे स्कूल पहुंचती हैं।
बच्चों की खुशी देती है आगे बढ़ने की ताकत
3 kilometers on a hilly terrain:शिक्षिकाओं का कहना है कि रास्ता चाहे कितना भी खतरनाक क्यों न हो, जब वे बच्चों को स्कूल में इंतजार करते देखती हैं और उनका मुस्कुराता चेहरा सामने आता है, तो सारी थकान और डर गायब हो जाता है। बच्चों के प्रति यही प्यार और जिम्मेदारी का भाव उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है। कर्मिला टोप्पो साल 2014 से इस स्कूल में अपनी सेवाएं दे रही हैं और हर मानसून उन्हें इसी संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
कलेक्टर ने की जज्बे की सराहना
3 kilometers on a hilly terrain:इन दोनों शिक्षिकाओं के समर्पण की कहानी जब बलरामपुर की कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी तक मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए पहुंची, तो उन्होंने इस पर गहरा सम्मान व्यक्त किया। कलेक्टर ने कहा कि ऐसी निष्ठावान शिक्षिकाएं पूरे जिले और शिक्षा जगत के लिए गर्व का विषय हैं। उनका यह अद्भुत समर्पण अन्य शिक्षकों के लिए भी एक मिसाल है।

