रिपोर्टर: अनिल सिंह
Guna : मध्यप्रदेश के गुना जिले से ताल्लुक रखने वाले सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई शुरू की है।
OBC के बाद ST वर्ग के प्रमाण पत्र पर आरक्षण लेने का आरोप
Guna मामले की जांच में सामने आया है कि शासकीय शिक्षक के पद पर कार्य करते समय उन्होंने स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दर्शाया था। हालांकि, बाद में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा देकर डीएसपी पद पर चयनित होते समय उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के आरक्षण का लाभ लिया।
1984 में जारी जाति प्रमाणपत्र जांच में अमान्य घोषित
Guna शिकायतकर्ता हरवीर सिंह रघुवंशी की अर्जी पर “राज्य स्तरीय छानबीन समिति” ने मामले के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान विदिशा जिले से वर्ष 1984 में जारी किए गए अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य पाया गया। समिति ने प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और मूल निवास से जुड़े तथ्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विभिन्न आपराधिक धाराओं और SC-ST एक्ट में मामला दर्ज
Guna पुलिस मुख्यालय भोपाल के सतर्कता थाने में पूर्व आईपीएस के खिलाफ धोखाधड़ी, षड्यंत्र और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि रघुवीर सिंह मीना की पत्नी ममता मीना चांचौड़ा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुकी हैं। फिलहाल पुलिस इस फर्जीवाड़े से जुड़े सभी पुराने रिकॉर्ड्स खंगाल रही है।
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