रिपोर्टर: दीपिका गुप्ता
India’s Giant Leap in the Defence Sector : वैश्विक रक्षा बाजार में भारत का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में एक बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत की अत्याधुनिक ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी ‘आकाशतीर’ एयर डिफेंस सिस्टम को अपने सैन्य बेड़े में शामिल करने की गहरी इच्छा जताई है। इस मेगा डिफेंस डील को लेकर दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। यदि यह रक्षा सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यूएई भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
India’s Giant Leap in the Defence Sector रणनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने की तैयारी
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और यूएई के बीच यह वार्ता अभी प्रारंभिक चरणों में है, लेकिन वैश्विक व मध्य-पूर्व के मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यूएई विशेष रूप से ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को अभेद्य बनाना चाहता है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र में हालिया संघर्षों के बाद यूएई अपनी रक्षा तैयारियों को बहुआयामी बनाने में जुटा है।
India’s Giant Leap in the Defence Sector ब्रह्मोस और आकाशतीर की जुगलबंदी क्यों है खास?
- दुनिया की सबसे तेज मिसाइल: भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार ‘ब्रह्मोस’ को दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है, जो जमीन, हवा और समुद्र कहीं से भी सटीक मार कर सकती है। रूस और यूएई के मधुर संबंधों को देखते हुए इस निर्यात सौदे को रूस से भी आसानी से हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
- आकाशतीर डिफेंस नेटवर्क: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा भारतीय सेना के लिए विकसित किया गया ‘आकाशतीर’ एक अत्याधुनिक ऑटोमैटिक एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है। यह पलक झपकते ही हवाई खतरों को भांपकर जवाबी कार्रवाई शुरू करने में सक्षम है।
India’s Giant Leap in the Defence Sector यूएई की बदली रणनीति और भारत का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यूएई अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं का दायरा बढ़ा रहा है, जिससे उसे अधिक कूटनीतिक स्वतंत्रता मिल सके। भारत के साथ यह गठजोड़ खाड़ी में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार होगा।
गौर करने वाली बात यह है कि मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 4 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है, जो एक दशक पहले महज 7.26 मिलियन डॉलर था। वैश्विक स्तर पर ब्रह्मोस की बढ़ती साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूएई के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे देश भी इसे हासिल करने की कतार में हैं।

