Major Fraud in NEET ExamMajor Fraud in NEET Exam
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रिपोर्टर: निशांत शर्मा

Major Fraud in NEET Exam : देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी’ (NEET-UG) में सेंध लगाने वाले एक अंतरराज्जीय सॉल्वर गैंग का बिहार पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। रविवार को हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि इस शातिर गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात तकनीकी सुरक्षा चक्र यानी बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली (Biometric Verification System) को ही हैक कर लिया था। जांच अधिकारियों के अनुसार, वेरिफिकेशन स्टाफ की मिलीभगत से असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी ‘सॉल्वर’ छात्रों को परीक्षा हॉल के भीतर प्रवेश कराया गया था।

Major Fraud in NEET Exam मेडिकल छात्र ही निकला गिरोह का मास्टरमाइंड

पुलिस अनुसंधान में यह बात साफ हुई है कि इस पूरे काले कारनामे का मुख्य सूत्रधार पावापुरी मेडिकल कॉलेज (राजगीर) का छात्र रविशंकर है। रविशंकर ने विभिन्न प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे मेधावी छात्रों का एक नेटवर्क तैयार किया था, जिन्हें पैसों का लालच देकर ‘सॉल्वर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। गिरोह का मुख्य निशाना ऐसे अमीर और कमजोर छात्र थे, जो किसी भी कीमत पर मेडिकल में दाखिला चाहते थे।

Major Fraud in NEET Exam पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र ने बदली पहचान, बना बायोमेट्रिक स्टाफ

इस साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन में की गई हेराफेरी है। जांच में पाया गया कि पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) के चतुर्थ वर्ष के छात्र मयंक कश्यप (निवासी हाजीपुर) ने अंकित कुमार नामक व्यक्ति के नाम पर फर्जी तरीके से बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में परीक्षा केंद्र में एंट्री ली थी। मयंक ने ही अंदर रहकर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया और वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वरों का थंब इंप्रेशन व डेटा पास करवाकर उन्हें परीक्षा में बिठाया।

Major Fraud in NEET Exam 30 गिरफ्तार, हर सीट के लिए 12 लाख रुपये का सौदा

लखीसराय के एसडीपीओ (SDPO) शिवम कुमार ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस रैकेट के तहत प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था। एडवांस के तौर पर 1 से 2 लाख रुपये लिए गए थे, जबकि बाकी रकम परीक्षा पास होने और मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद दी जानी थी।

अब तक की कार्रवाई में कुल 30 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इनमें 9 सॉल्वर (जो खुद मेडिकल छात्र हैं), बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी, एक मूल अभ्यर्थी और गिरोह के अन्य सदस्य शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत की शिकायत पर स्थानीय थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन को खंगालकर इस सिंडिकेट की आर्थिक जड़ों को काटने में जुटी है।

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