रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : जिला नियोजन कार्यालय के सभाकक्ष में बुधवार को ‘जनजातीय प्रश्न’ पर एक दिवसीय विशेष सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के त्रिवेणीगंज, छातापुर, किशनपुर और सुपौल सहित कई प्रखंडों से आए अनुसूचित जनजाति समुदाय के महिला व पुरुष प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय वर्ग की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों पर चर्चा करना और उनके समग्र विकास में आ रही बाधाओं का समाधान खोजना था। कार्यक्रम का शुभारंभ अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन और जिला कल्याण पदाधिकारी राम कृपाल प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आजीविका के अवसरों पर जोर
Supaul सम्मेलन के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष रूप से मंथन हुआ। प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की सख्त आवश्यकता है। इसके अलावा, समुदाय के लोगों के लिए आजीविका के नए साधन तैयार करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस नीति बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का आह्वान
Supaul चर्चा के दौरान वक्ताओं ने जनजातीय समाज की विशिष्ट कला, साहित्य, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया। डॉ. सकलदेव चंद उरांव, ज्ञान बहादुर गुरु और रिंकी देवी सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि इस अनूठी संस्कृति को न केवल सहेजने की जरूरत है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रोत्साहन देना भी बेहद आवश्यक है। प्रतिनिधियों ने अपनी पारंपरिक कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास करने की मांग उठाई।
अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद, जल्द पहल की उम्मीद
Supaul कार्यक्रम में अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी और प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों ने प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। अधिकारियों ने माना कि इस तरह के सीधे संवाद से जमीनी स्तर की समस्याओं को गहराई से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि सम्मेलन में आए महत्वपूर्ण सुझावों और मुद्दों पर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस आयोजन को जनजातीय समाज की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का एक मजबूत माध्यम माना जा रहा है।
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