रिपोर्टर: दीनानाथ माऔर
Aurangabad : जिला प्रशासन एक तरफ बाल श्रम उन्मूलन को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहा है और जागरूकता अभियान चलाने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी तरफ मदनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि भवन परिसर में ही इन दावों की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं। परिसर में बने पॉलीवियर हाउसिंग के सामने दो छोटे बच्चों को झाड़-झंखाड़ काटने के काम में लगाया गया। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम, जूते या दस्ताने के ये बच्चे हाथों में टांगी और हसुली लेकर घनी झाड़ियों की कटाई करते कैमरे में कैद हुए हैं।
स्कूल जाने की उम्र में हाथों में थमाए कुल्हाड़ी और हसुली
Aurangabad जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह जोखिम भरा काम कराया जा रहा था। पूछताछ करने पर बच्चों ने बताया कि कृषि भवन के कर्मियों ने उन्हें सुबह से शाम तक काम पर रखा था और पूरे दिन की मजदूरी के तौर पर महज 200 रुपये देने का वादा किया था। यह घटना न केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम का खुला उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
बाल श्रम कानून का उल्लंघन और आर्थिक शोषण का आरोप
Aurangabad बाल श्रम कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम करवाना संज्ञेय अपराध है। ऐसे में सरकारी परिसर के भीतर ही बच्चों से काम करवाना और मनरेगा की तय दरों से भी कम मजदूरी देना बच्चों के अधिकारों का हनन है। स्थानीय स्तर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी, जिससे इस पूरे मामले में स्थानीय कर्मियों की लापरवाही पर संदेह गहरा गया है।
जांच के बाद दोषी कर्मचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
Aurangabad मामले की जानकारी मिलने पर जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने कहा कि विभाग की ओर से किसी भी बच्चे से काम कराए जाने की बात सही नहीं है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि सामने आई तस्वीरों और वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कृषि विभाग के परिसर का मामला सही पाया गया और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सिद्ध हुई, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

