रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Bhopal : मध्य प्रदेश कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद भोपाल वेस्टर्न बायपास फोरलेन के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर आधारित लगभग 35.16 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पर 3225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बायपास के बन जाने से शहर के मुख्य रास्तों पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होगी, जिससे राजधानी के नागरिकों को लंबे समय से मिल रहे ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।
एक्सेस कंट्रोल रूट और केवल दो मुख्य एंट्री-एग्जिट पॉइंट
Bhopal इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें सामान्य सड़कों की तरह वाहन बीच से प्रवेश या निकासी नहीं कर सकेंगे। यातायात को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने के लिए पूरे 35 किलोमीटर के दायरे में केवल दो प्रमुख कट पॉइंट बनाए जाएंगे। पूर्व में इसकी प्रस्तावित लंबाई 40.90 किलोमीटर थी, जिसे नए रूट एलाइनमेंट के तहत 5.74 किमी घटाकर 35.16 किमी कर दिया गया है। 70 मीटर चौड़े इस मार्ग पर 1 आरओबी, 2 फ्लाईओवर, 15 अंडरपास और 2 प्रमुख जंक्शन का निर्माण भी प्रस्तावित है।
ईंधन व समय की बचत के साथ इंदौर-राजगढ़ मार्ग होगा सुगम
Bhopal इस कॉरिडोर के शुरू होने से इंदौर, उज्जैन और राजगढ़ की ओर से आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी। परियोजना के लिए भोपाल और रायसेन जिले की लगभग 305 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिसमें 112 हेक्टेयर से अधिक भोपाल की निजी भूमि और 43 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।
भोपाल रिंग रोड का सपना होगा पूरा, बढ़ेगा व्यवस्थित विकास
Bhopal वेस्टर्न बायपास के मौजूदा बायपास से जुड़ते ही भोपाल को अपनी पूर्ण रिंग रोड मिल जाएगी। इससे कोलार, सीहोर रोड और आसपास के पश्चिमी इलाकों में नई व्यावसायिक व आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी। शहर के बाहर से भारी वाहनों के गुजरने से हादसों में कमी आएगी और पश्चिमी भोपाल का शहरी विकास अधिक व्यवस्थित और आधुनिक तरीके से हो सकेगा।

