रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के सुपौल जिले में कोसी नदी के विस्थापित और पुनर्वासित परिवारों के अधिकारों को लेकर जन-आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को युवा नेता एवं समाजसेवी लव यादव की अगुवाई में हजारों पीड़ितों ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से प्रभावित परिवारों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरते हुए अपनी दशकों पुरानी लंबित समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की पुरजोर वकालत की।
Supaul भूमि मालिकाना हक और होल्डिंग टैक्स पर तीखे सवाल
धरना स्थल पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए लव यादव ने प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कोसी की विभीषिका झेल चुके यह परिवार वर्षों से अपने बुनियादी हक के लिए संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेती है।
“वर्षों बीत जाने के बाद भी पुनर्वासित परिवारों को उनकी अपनी जमीन का मालिकाना हक (स्वामित्व अधिकार) नहीं मिला है। इसके विपरीत, उन पर होल्डिंग टैक्स का अतिरिक्त बोझ लादा जा रहा है। जब तक पीड़ितों को उनके अधिकार नहीं मिलते, यह जन-आंदोलन थमने वाला नहीं है।”
Supaul विस्थापितों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी तीन मुख्य मांगों को प्राथमिकता से रखा:
- स्वामित्व अधिकार: पुनर्वासित भूमि का अविलंब वैधानिक मालिकाना हक (पट्टा) प्रदान किया जाए।
- कराधान में राहत: प्रभावित परिवारों पर आरोपित किए जा रहे होल्डिंग टैक्स को पूर्णतः समाप्त किया जाए।
- आवास योजना का लाभ: सभी बेघर व पात्र कोसी पीड़ितों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएं।
जन-एकजुटता और उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस शांतिपूर्ण महाधरने में जिले के विभिन्न दूर-दराज़ इलाकों से आए पुरुष, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक रवैये के खिलाफ उग्र नारेबाजी होती रही।
वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने तय सीमा के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को संपूर्ण कोसी प्रमंडल स्तर पर और अधिक व्यापक तथा चरणबद्ध रूप दिया जाएगा।
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