रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul Jail Drug De Addiction Campaign : बिहार के सुपौल जिले में स्थित मंडल कारा (जेल) में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA), नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में बंद बंदियों को नशे के दुष्प्रभावों, कानूनी प्रावधानों और पुनर्वास के उपायों के प्रति सचेत करना था।
Supaul Jail Drug De Addiction Campaign नशा कमजोर इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि मानसिक-शारीरिक निर्भरता: सचिव
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सुपौल के सचिव मो. अफजल आलम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। बंदियों को संबोधित करते हुए सचिव मो. अफजल आलम ने एक महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “आम तौर पर लोग नशे की लत को कमजोर इच्छाशक्ति से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक गंभीर मानसिक और शारीरिक निर्भरता है। लगातार नशीले पदार्थों के सेवन से मनुष्य का मस्तिष्क और शरीर उस पर इस कदर निर्भर हो जाता है कि वह चाहकर भी इसे आसानी से नहीं छोड़ पाता।”
उन्होंने चेतावनी दी कि नशीली दवाओं का ओवरडोज या गलत कॉम्बिनेशन जानलेवा साबित हो सकता है। नशा न सिर्फ स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि व्यक्ति को अपराध की दुनिया की ओर भी धकेल देता है।
Supaul Jail Drug De Addiction Campaign मुफ्त कानूनी सहायता और पुनर्वास की दी जानकारी
सचिव ने बंदियों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) की कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया:
- निशुल्क विधिक सहायता: मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित पीड़ितों और उनके परिवारों को प्राधिकार की ओर से मुफ्त कानूनी मदद दी जाती है।
- पुनर्वास सुविधाएं: नशे से ग्रसित लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों (De-addiction Centers) से जोड़कर उचित परामर्श और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन जी सकें।
- टोल-फ्री हेल्पलाइन: जरूरतमंद लोग सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यालय के अलावा नालसा के टोल-फ्री नंबर 19100 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
Supaul Jail Drug De Addiction Campaign जेल प्रशासन और बंदियों की रही गरिमामयी मौजूदगी
इस जागरूकता अभियान के दौरान सुपौल जेल के अधीक्षक मोतीलाल, जेलर शंभू कुमार, जेल के चिकित्सक सहित कई सुरक्षाकर्मी और बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे। जेल प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकार के अधिकारियों ने संकल्प दोहराया कि समाज और जेल के भीतर सुधारात्मक माहौल तैयार करने के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
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