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रिपोर्टर: अरूण तिवारी

Noida Smart Garbage System : साइबर सिटी और हाई-टेक टाउनशिप के रूप में मशहूर नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) के नाम एक और बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ गई है। नोएडा प्राधिकरण ने कचरा प्रबंधन (Waste Management) को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए देश की पहली ‘स्मार्ट कचरा व्यवस्था’ की शुरुआत की है। इस अनूठी तकनीक के तहत अब सड़कों पर डस्टबिन से कचरा बाहर नहीं फैलेगा, बल्कि डस्टबिन खुद फुल होते ही सफाईकर्मियों को अलर्ट भेजकर बुलाएगा।

Noida Smart Garbage System कैसे काम करेगी यह स्मार्ट तकनीक? इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से होगी मॉनिटरिंग

जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत शहर में अत्याधुनिक सेंसर (Sensors) और जीपीएस (GPS) तकनीक से लैस विशेष डस्टबिन लगाए जा रहे हैं।

  • ऑटोमैटिक अलर्ट: जैसे ही कोई डस्टबिन कचरे से पूरा भर जाएगा, उसमें लगे सेंसर एक्टिव हो जाएंगे।
  • कंट्रोल रूम में घंटी: सेंसर एक्टिव होते ही नोएडा के ‘इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC) में स्वतः ही एक अलार्म या घंटी बज जाएगी।
  • त्वरित एक्शन: आईसीसीसी से तुरंत नजदीकी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहन को जीपीएस लोकेशन भेजी जाएगी, और गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन खाली कर देगी।

Noida Smart Garbage System पहले चरण में 320 सार्वजनिक शौचालयों के बाहर लगेंगे हाई-टेक डस्टबिन

नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में इस व्यवस्था को शहर के वेंडिंग जोन, बाजारों और मुख्य रास्तों पर बने 320 सार्वजनिक शौचालयों के बाहर लागू किया जा रहा है। महुआ (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने भी नोएडा के इस पीपीपी (PPP) मॉडल की सराहना करते हुए देश के अन्य नगर निगमों को इसे अपनाने की सलाह दी है। वर्तमान में शहर में शौचालयों का ढांचा कुछ इस प्रकार है:

शौचालय का प्रकारकुल संख्या
पब्लिक टॉयलेट117
कम्युनिटी टॉयलेट67
पिंक टॉयलेट (महिलाओं के लिए)16
यूरिनल ब्लॉक्स120

Noida Smart Garbage System आबादी बढ़ने से बदला गणित, कचरा कलेक्शन के लिए जारी होंगे दो नए टेंडर

नोएडा में कचरा प्रबंधन का यह मेकओवर इसलिए भी जरूरी हो गया था क्योंकि शहर की आबादी में भारी इजाफा हुआ है। पुरानी जनगणना के अनुसार जहां प्राधिकरण केवल 6.5 लाख की आबादी (2 लाख मकान) के लिए कचरा कलेक्शन संभाल रहा था, वहीं नए सर्वे में नोएडा की आबादी बढ़कर 14.5 लाख (करीब 5 लाख मकान) तक पहुंच चुकी है। इस बढ़ती आबादी को देखते हुए प्राधिकरण अब कम से कम दो नए मेगा टेंडर जारी करने जा रहा है, जिससे हर गली, गांव, सेक्टर, हाउसिंग सोसाइटी और कमर्शियल मार्केट को पूरी तरह कवर किया जा सके।

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