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रिपोर्टर: जया दुबे

Ujjain Mahakal Temple Digital Services : मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर का दरबार अब पूरी तरह हाई-टेक और डिजिटल रंग में रंग चुका है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों शिवभक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और मंदिर की व्यवस्थाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन पेमेंट और क्यूआर कोड (QR Code) तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू कर दिया है। अब महाकाल परिसर में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को हर कोने में डिजिटल गेटवे की सुविधा मिल रही है, जिससे मंदिर प्रबंधन की पूरी कार्यप्रणाली बदल गई है।

Ujjain Mahakal Temple Digital Services भस्म आरती की बुकिंग और ₹250 का VIP प्रोटोकॉल शुल्क अब केवल डिजिटल

महाकाल मंदिर की रीढ़ मानी जाने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती, संध्या आरती और शयन आरती की बुकिंग प्रक्रिया को अब पूरी तरह कैशलेस और डिजिटल कर दिया गया है। इसके अलावा, शीघ्र दर्शन (VIP/प्रोटोकॉल दर्शन) के लिए निर्धारित ₹250 का शुल्क भी अब भक्तों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन ही जमा करना पड़ता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि सभी सेवाओं को ऑनलाइन करने से मैन्युअल रसीद काटने का झंझट खत्म हो गया है और किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या हेरफेर की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो गई है।

Ujjain Mahakal Temple Digital Services परिसर में लगे स्मार्ट क्यूआर कोड, सीधे खाते में जा रही दान राशि

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब भक्तों को नकद दान देने या रसीद काउंटरों पर लंबी लाइनों में लगने की आवश्यकता नहीं है। मंदिर परिसर में जगह-जगह आधिकारिक क्यूआर कोड स्टैंड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से सीधे स्कैन करके अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार डिजिटल दान दे सकते हैं। इस पारदर्शी व्यवस्था से जहां भक्तों का कीमती समय बच रहा है, वहीं मंदिर समिति के लिए भी रोजाना आने वाले भारी-भरकम कैश के रखरखाव और उसकी गिनती का सिरदर्द खत्म हो गया है।

Ujjain Mahakal Temple Digital Services रोजाना आते हैं लाखों श्रद्धालु, सालभर में महाकाल को मिला ₹168 करोड़ का रिकॉर्ड चढ़ावा

बाबा महाकाल के प्रति देश और दुनिया के श्रद्धालुओं में कितनी अटूट आस्था है, इसका अंदाजा मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ से लगाया जा सकता है।

  • दैनिक फुटफॉल: महाकाल मंदिर में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 1 लाख और सावन, त्योहारों या छुट्टियों के दिनों में यह आंकड़ा 5 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच जाता है।
  • रिकॉर्ड तोड़ कमाई: इसी भारी जनसैलाब और सुगम डिजिटल भुगतान प्रणाली के चलते मंदिर की आय ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2025 में महाकाल मंदिर को ऑनलाइन दान, चढ़ावे और वीआईपी एंट्री टिकटों के जरिए कुल 168 करोड़ रुपये की बंपर आय प्राप्त हुई है।

धार्मिक स्थलों के आधुनिक और पारदर्शी प्रबंधन के मामले में उज्जैन का महाकाल मंदिर पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरा है।

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