Muzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-lawMuzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-law
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Muzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-law:उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद से एक ऐसी मानवीय और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज के सामने एक बड़ी मिसाल पेश की है। पति और ससुर की एक साथ हुई दर्दनाक मौत के गम से उबरते हुए एक सास ने अपनी विधवा बहू की दूसरी शादी कराकर उसके उज्ज्वल भविष्य की राह खोल दी है। इस अनोखी शादी में देवर ने भी भाई का फर्ज निभाते हुए अपनी भाभी का कन्यादान किया।

क्या है पूरा मामला?

Muzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-law:प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 10 साल पहले हरिद्वार के बहादुरपुर की रहने वाली मीनाक्षी की शादी मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे के दयालपुरम निवासी रोहित के साथ हुई थी। दोनों की जिंदगी हंसी-खुशी बीत रही थी और उनकी दो बेटियां—7 साल की रितु और डेढ़ साल की अविका हैं।

लेकिन इस हंसते-खेते परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूट पड़ा, जब 14 अगस्त को कैंसर से पीड़ित पति रोहित के पिता ओमपाल का निधन हो गया। पिता की मौत के गहरे सदमे और गम को रोहित बर्दाश्त नहीं कर सका, और अगले ही दिन यानी 15 अगस्त को रोहित की भी अचानक मौत हो गई। एक ही घर में पिता और बेटे की अर्थी उठने से परिवार पर संकट आ गया।

सास ने लिया बड़ा फैसला, देवर ने निभाया कन्यादान

Muzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-law:घर में जवान बहू और दो छोटी बच्चियों का भविष्य अंधकार में देख सास सुनीता ने हिम्मत जुटाई और अपनी बहू मीनाक्षी की दूसरी शादी कराने का साहसिक फैसला लिया।

मीनाक्षी की रजामंदी के बाद, सास सुनीता ने राजस्थान के नारायणपुर में चाट की दुकान चलाने वाले योगेश के साथ आर्य समाज मंदिर में बुधवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ उसकी शादी कर विदा किया। इस दौरान देवर मोहित ने बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए अपनी भाभी का कन्यादान किया। इस अनूठी पहल की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है।

मीनाक्षी और परिवार की प्रतिक्रिया

Muzaffarnagar mother-in-law marries daughter-in-law:इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए मीनाक्षी ने बताया कि यह शादी पूरी तरह उनकी अपनी मर्जी से हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके सास-ससुर और परिवार उनके लिए बेहद अच्छा सोच रहे हैं और उन पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है।

वहीं, देवर मोहित ने कहा कि पिता और भाई के निधन के बाद भाभी की उम्र और दोनों बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी थी। इसलिए सभी की सहमति से यह फैसला लिया गया। इसके अलावा, सास सुनीता ने कहा कि वह अपनी बहू को बेटी बनाकर पूरे सम्मान के साथ विदा कर रही हैं, और आगे भी उनके साथ रिश्ता बना रहेगा।

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